अनुच्छेद 5 और 6 - Page 116

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जब तक कि वह कुछ विशेष परिस्थितियों की मांग की पूर्ति न करे। पाकिस्तान जाना और फिर लौटकर भारत आना, इस व्यापक नियम में जो हमने बनाया है कोई फेरबदल नहीं करता कि ऐसा व्यक्ति नागरिक नहीं होगा। अपवाद यह है, जैसाकि मेरे माननीय मित्र श्री एन. गोपालस्वामी अय्यंगर ने कहा था, दो सरकारों, भारत सरकार और पाकिस्तान सरकार के बीच बातचीत के दौरान उन्होंने एक व्यवस्था की थी जिसके अनुसार भारत सरकार उन लोगों को अनुज्ञात करने के लिए सहमत थी जो भारत से पाकिस्तान चले गए थे और फिर पाकिस्तान से भारत आ गए थे और वे एक अस्थायी यात्री के रूप में या व्यापारी के रूप में या बीमार रिश्तेदार को देखने के अस्थायी स्वरूप के किसी अन्य प्रयोजन के लिए वापस आने के लिए अनुज्ञात नहीं किए गए थे बल्कि उन्हें भारत लौटने के लिए अभिव्यक्त रूप से और स्थायी तौर पर बसने तथा भारत में स्थायी तौर पर रहने के लिए अनुज्ञात किया गया था। भारत में अब ऐसे कुछ लोग हैं। अतः अब सवाल यह है कि ऐसे किसी व्यक्ति को, जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चला गया है अनुज्ञात न करने का जो सिद्धांत हमने प्रतिपादित किया है उसका कोई अपवाद होना चाहिए या नहीं। इस अनुच्छेद में यह महसूस किया गया और यह ठीक ही महसूस किया गया कि जब सरकार ने किसी व्यक्ति को उसके पुराने निवास पर लौटने और वहाँ स्थायी रूप से बसने के लिए अनुज्ञात करने का वचन दिया है तो उस व्यक्ति से नागरिक बनने की पात्रता छीनना ठीक नहीं होगा। जैसाकि मेरे मित्र श्री गोपाल स्वामी अय्यंगर ने कहा है, हिन्दुओं और मुसलमानों की विशाल आबादी को ध्यान में रखते हुए इस प्रवर्ग में आने वाले लोग बहुत थोड़े हैं कोई 2-3 हजार होंगे। यदि आज हम यह कहें कि हमें उन लोगों को जिन्हें हमारी अपनी सरकार ने ठीक या गलत, स्थायी निवास के प्रयोजनों के लिए पाकिस्तान से आने के लिए अनुज्ञात कर दिया था, अनुज्ञात नहीं करना चाहिए तो यह मेरे निर्णय में द्वेषपूर्ण होगा, यह मेरे निर्णय में विश्वास भंग होगा। इसके बाद परमिट पद्धति को चालू रखने से भारत सरकार को निवारित करने के लिए सदन विधेयक लाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। यह इस सदन के विशेषाधिकार और शक्ति में है, लेकिन मैं नहीं समझता कि सदन यदि यह कहे कि इन लोगों को, जैसाकि मैंने कहा; जो बहुत थोड़े हैं, जो हमारी सरकार के आश्वासन पर यहाँ अपना घर बसाने के लिए आए हैं, नागरिकता के अधिकार से वंचित किया जाए तो यह सदन उचित कार्रवाई करेगा या तथाकथित सार्वजनिक अन्तःकरण के अनुसार कार्य करेगा। महोदय, इसलिए मैं नहीं समझता कि इस आलोचना में जो इन अनुच्छेदों के बारे में की गई है कोई तत्व है और आशा है, सदन उन्हें यथावत स्वीकार करेगा।

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