भारत सरकार अधिनियम, 1935 (संशोधन विधेयक) की धारा 291 - Page 119

98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : बिल्कुल ठीक, यही बात मैं स्पष्ट कर रहा हूँ। जैसा कि मैंने कहा था, मूल अनुच्छेद 291 जो अनुकूलित नहीं था और प्रस्तावित नये खंड के बीच जो एकमात्र अन्तर पाया जाएगा, वह यह है कि विधानमंडल की संरचना से संबंधित उपबंधों को परिवर्तित करने के लिए गवर्नर जनरल को शक्ति देना इस नये अनुच्छेद द्वारा प्रस्तावित है। मैं मानता हूँ कि यह परिवर्तन है।

डॉ. पी. एस. देशमुख : जिसमें अनुसूची 5 और 6 शामिल हैं।

मननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ओ, हॉ; बिल्कुल सही। मैं पूर्णरूप से स्वीकार करता हूॅ कि यही परिवर्तन किया जा रहा है। अब प्रश्न यह है कि यह परिवर्तन क्यों किया जा रहा है। हम संरचना में बदलाव करके भी गर्वनर जनरल को शक्ति देने की खातिर यह परिवर्तन क्यों कर रहे हैं इसका कारण उस स्थिति में मिलेगा जिसमें हम अपने आप को पाते हैं। माननीय सदस्यों को स्मरण होगा कि विभाजन के कारण आबादी की बहुत भारी अदलाबदली हुई है। पूर्वी पंजाब की आबादी निश्चय ही किसी एक ढांचे में नहीं आती है। शरणार्थी आ रहे हैं, जा रहे हैं। 1 अप्रैल को आबादी इतनी ज्यादा थी; छह माह बाद वह उस संख्या से भिन्न संख्या हो सकती है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल और अन्य अनेक प्रांतों के संबंध में जहाँ शरणार्थी भारत सरकार द्वारा अपनी पुनर्वास स्कीम के अन्तर्गत ले लिए गए हैं अथवा शरणार्थीस्वेच्छया एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए हैं। प्रकट है, आप पांचवी और छठी अनुसूची में अन्तर्विष्ट उपबंधों को जो विधानमंडल में संख्याओं के बारे में हैं, वही रहने के लिए अनुज्ञात नहीं कर सकते जो उस समय थे जबकि वस्तु-स्थिति के रूप में हम जानते हैं कि आबादी का अनुसूचियों में विहित संख्याओं से कोई सापेक्षता नहीं रही। इसलिए आबादी की अदला-बदली को ध्यान में रखने की दृष्टि से गवर्नर जनरल को अनुसूचियों को, जो विधानमंडल की संरचना के विषय में हैं, बदलने की शक्ति दी जाती है।

आशा है, मेरे माननीय मित्र अब समझ जाएंगे कि सदन या सदनों की संरचना के संबंध में आदेश करने की अतिरिक्त शक्ति देने में आशय गवर्नर जनरल को ऐसा करने के लिए अनुज्ञात करना है जिससे प्रभावित प्रांतों में विभिन्न विधानमंडलों की सदस्य संख्या को इन प्रांतों की संख्या के अनुरूप बनाना है। इसका कोई जघन्य प्रयोजन नहीं है।

डॉ. पी. एस. देशमुख : इस स्थिति में सुधार करने के लिए आपके पास पूरे दो साल थे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह भिन्न विषय है मैं केवल यह बता रहा हूँ कि इस नये खंड द्वारा ये उपबंध क्यों पुरःस्थापित किए जा रहे हैं।