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मैं पहले ही कह चुका हूँ कि अन्य उपबंध उस सबके उद्धरण मात्र हैं जो मूल धारा 291 में अन्तर्विष्ट है। यह शक्ति अतिरिक्त या अनावश्यक प्रयोजन के लिए नहीं ली गई है और न ही इसका प्रयोग सद्भाविक प्रयोजन से भिन्न किसी बात के लिए किया जाना आशयित है। अतः इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मेरा निवेदन है कि खंड 4 इन शक्तियों को जो मूलतः सपरिषद् महामहिम सम्राट में निहित थीं, गवर्नर जनरल में निहित किए जाने की दृष्टि से, जो उनके उत्तरवर्ती हैं, और संरचना को बदलने की अतिरिक्त शक्ति उसे देने के लिए पूरी तरह न्यायोचित प्रस्ताव है, क्योंकि विभिन्न प्रांतों में संख्या की व्यवस्था 15 अगस्त, 1947 से बदल गई है। मैं ठीक से समझता हूँ कि उद्देश्यों और कारणों के कथन में एक गलती है जिसमें एक
खास निर्देश पश्चिम बंगाल के प्रति किया गया है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूँ कि इस खण्ड को रखने का आशय एक साधारण उपबंध के रूप में था जिसका प्रयोग गवर्नर जनरल द्वारा किसी भी प्रांत के संबंध में, न कि विशेषतौर पर पश्चिम बंगाल के संबंध में, किसी भी विषय को सुधारने के लिए किया जा सकेगा; और मैं समझता हूँ वह एक चूक थी जो नहीं होनी चाहिए थी। सदन के सदस्यों ने उस विशिष्ट खंड की विशिष्ट शब्दावली को चुन लिया है जहाँ पश्चिम बंगाल के प्रति विशिष्ट निर्देश किया गया है ताकि सरकार को पश्चिम बंगाल में विधानमंडल के प्रति किसी प्रकार के दुर्भाव से आरोपित किया जा सके। जैसा मैंने कहा है, ऐसा कुछ नहीं है। ये खंड साधारण हैं; यदि ऐसी स्थिति पैदा होती है जिसमें पश्चिमी बंगाल में उनका उपयोग अपेक्षित है, तो उनका उपयोग किया जा सकता है। मेरे प्रांत बम्बई के लिए भी उनका प्रयोग किया जा सकता है। जहाँ संभवतः आज किसी भी दशा में, ऐसी कोई परिस्थिति दिखाई नहीं पड़ती। इसलिए यदि मुझे ऐसा कहने की अनुमति हो तो, उस दुर्भाग्यपूर्ण वक्तव्य से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इस खंड के संबंध में कोई गुप्त सौदेबाजी चल रही है।
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शब्दों को हटाना संभव नहीं है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं अपने माननीय मित्रों को बता रहा हूँ
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कि उद्देश्यों और कारणों का कथन अधिनियम का अंग नहीं होता इसलिए उद्देश्यों और कारणों का कथन में किसी शब्द या खंड या वाक्य को विलुप्त करने के लिए कोई संशोधन प्रस्तावित नहीं किया जा सकता। ज्योंही यह विधेयक अधिनियम बन जाएगा उद्देश्यों और कारणों का कथन रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाएगा। यह उद्देशिका से भिन्न है। मैं सोचता हूँ सदन के सदस्य उद्देशिका पर ध्यान केंद्रित करें जहाँ ’पश्चिम बंगाल’ शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए मेरा निवेदन है कि