भारत सरकार अधिनियम, 1935 (संशोधन विधेयक) की धारा 291 - Page 121

100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस खंड विशेष के बारे में झगड़ने के लिए वास्तव में कुछ भी नहीं है। पहले तो, यह उसी मूल उपबंध को पुनःस्थापित करता है जो अनुकूलन से पहले भारत शासन अधिनियम, 1935 में विद्यमान था, दूसरे, यह शक्ति देना प्रस्तावित करता है जो प्रांतों में परिवर्तित स्थिति के कारण आवश्यक हो गई है।

माननीय सदस्य : महोदय, मैं प्रस्तावित करता हूँ कि अब प्रश्न रखा जाए।

श्री एच. वी. कामथ : महोदय, व्यवस्था के सवाल पर डॉ. अम्बेडकर ने नये मुद्दे उठाए हैं जिस पर हम चर्चा करना चाहते हैं और हमारे नियमों के नियम 33 के अधीन आप यह मान सकते हैं कि इस पर पर्याप्त बहस नहीं हुई है। और इसीलिए हम समाप्ति के लिए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इंकार करते हैं।

डॉ. पी. एस. देशमुख : लेकिन डॉ. अम्बेडकर प्रभारी मंत्री नहीं हैं।

माननीय उपसभापति : हाँ, ठीक है; और माननीय सदस्य श्री कामथ को इस

खंड पर बोलने के लिए काफी मौका मिल चुका है। इसलिए मैं समाप्ति के लिए प्रस्ताव को स्वीकार करता हूँ।

प्रश्न है-

“कि अब प्रश्न रखा जाए,“

प्रस्ताव अंगीकृत हुआ। माननीय उपसभापतिः (श्री टी. टी. कृष्णमाचारी) : आज हम अनुच्छेद 150 से

शुरू करते हैं। सदन को याद होगा कि इस अनुच्छेद पर, इसके मूल रूप में, बहस हुई थी और तीन संशोधन प्रस्तावित किए जाने के बाद वह अनुच्छेद पुनः प्रारूपण समिति के पास भेजा गया था। डॉ. अम्बेडकर ने अब एक नये अनुच्छेद का नोटिस दिया है। मेरा उनसे अनुरोध है कि उस अनुच्छेद को अर्थात् सूची 1 का संशोधन संख्या 1 प्रस्तावित करें (चौथा सप्ताह)। श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल : मुस्लिम) : महोदय, मेरा व्यवस्था का सवाल

है। क्या मैं इसे अभी पेश करूं या संशोधन प्रस्तावित किए जाने के बाद करूं।

माननीय उपसभापति : आप इसे अभी पेश कर सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : माननीय उपसभापति महोदय, जैसाकि मैं कुछ समय से देख रहा हूँ, प्रारूपण समिति सदस्यों के साथ अजूबे पर अजूबे करती जा रही

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 19 अगस्त, 1949, पृ. 473-74