भारत सरकार अधिनियम, 1935 (संशोधन विधेयक) की धारा 291 - Page 123

102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ग) लगभग बारहवां भाग ऐसे व्यक्तियों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक-मंडलों

द्वारा निर्वाचित होगा जो राज्य की ऐसी शिक्षण संस्थाओं में जो माध्यमिक

शिक्षा के स्तर से कम न हों, कम से कम तीन वर्ष से पढ़ा रहे हो, जो

संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन विहित की गई

हो।

(घ) लगभग एक-तिहाई भाग राज्य की विधानसभा के उन सदस्यों द्वारा

निर्वाचित होगा जो विधान सभा के सदस्य न हों;

(ड.) शेष सदस्य राज्यपाल द्वारा खंड (5) के उपबंधों के अनुसार नामित किए

जाएंगे।

(4) खंड (3) के उपखंड (क), उपखंड (ख) और उपखंड (ग) के अधीन निर्वाचित होने वाले सदस्य, ऐसे प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में चुने जाएंगे, जो संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन विहित किए गए तथा उक्त उपखंडों के और उक्त

खंड के उपखंड (घ) के अधीन निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होंगे।

(5) राज्यपाल द्वारा खंड (3) के उपखंड (ड.) के अन्दर नामित किए जाने वाले सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें निम्नलिखित विषयों के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो, अर्थात् :

साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा।’’

महोदय, जैसाकि आपने कहा था, यह अनुच्छेद भिन्न प्रारूप में, पिछली बार सदन के समक्ष था। उस रूप में अनुच्छेद का कहना था कि उच्च सदन की संरचना ऐसी होगी जो संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा विहित की जाए। सदन ने सोचा था कि प्रांतीय विधानमंडल को सांविधानिक ढांचे के महत्वपूर्ण अंग पर कार्रवाई करने का यह कोई उचित तरीका नहीं है, और यह कि उच्चसदन के गठन के विषय में कुछ ठोस और विनिर्दिष्ट होगा। संविधान सभा के सभापति ने कहा कि वे सदन के उन सदस्यों की भावनाओं की कद्र करते हैं जिनका वह मत था, और उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले पर प्रारूपण समिति को आगे विचार करना चिहए ताकि वह ऐसा प्रारूप प्रस्तुत कर सके जो उन सदस्यों द्वारा ज्यादा स्वीकार्य हो जिन्होंने उस तरह की आलोचना की थी। जैसा कि माननीय सदस्य देखेंगे, प्रस्तुत किया गया यह प्रारूप दो विचारधाराओं के बीच एक समझौता है। इस प्रारूप में, ठोस शब्दों में, विभिन्न प्रांतों में उच्च सदन के गठन का उल्लेख है। इसमें केवल यह उपबंधित है