106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भाग - VIII क
भाग -
क
अनुच्छेद 215-क
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* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं अपना संशोधन सं. 6, सूची-1, चौथा सप्ताह प्रस्तावित करता हूँ :
“कि भाग VIII के पश्चात् निम्नलिखित नया भाग अन्तःस्थापित किया जाए :
“भाग- VIII क
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215 क. इस संविधान में -
(क) ’अनुसूचित क्षेत्र’ पद से वे क्षेत्र अभिप्रेत हैं जो उन राज्यों के संबंध में जिनसे वे भाग क्रमशः सम्बद्ध है, उस पैरा के उपपैरा (2) के अधीन किए गए किसी आदेश के अधीन रहते हुए, पांचवीं अनुसूची के पैरा 18 से सम्बद्ध सारणी में परिभाषाओं के भाग I से भाग VII में विनिर्दिष्ट है।
(ख) ‘जनजाति क्षेत्र’ पद से वे क्षेत्र अभिप्रेत है जो छठी अनुसूची के पैरा 19 से सम्बद्ध सारणी के भाग I और II में विनिर्दिष्ट है। ये उस अनुसूची के पैरा 1 के उपपैरा (3) या पैरा 17 के खंड (ब) के उप-पैरा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश के अधीन है।
अनुसूचित क्षेत्रों और 215 ख. “(1) पांचवीं अनुसूची के भाग 1 में बताए गये 215 ख. “(1)
जनजाति क्षेत्रों का उपबंध के अनुसार असम, के अतिरिक्त ....किसी राज्य के प्रशासन अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और प्रशासन
नियंत्रण के लिए या प्रथम अनुसूची के भाग 2 के अनुसार लागू होंगे।
(2) छठी अनुसूची के उपबंध असम, राज्य के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के लिए लागू होंगे।“
महोदय, मेरा संशोधन केवल मूल अनुच्छेद 189 और 190 के स्थान पर है। हम केवल यह कर रहे हैं कि हम अनुच्छेद 189 और 190 में अन्तर्विष्ट उपबंधों को एक अन्य और पृथक भाग में अंतरित कर रहे हैं। इस स्थानान्तरण के कारण उनका
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 19 अगस्त, 1949, पृ. 492-93