108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
[ डॉ. अम्बेडकर के पूर्वोक्त दोनों संशोधन अंगीकृत हुए। अन्य संशोधन अस्वीकृत कर दिए गए। यथासंशोधित अनुच्छेद 250 संविधान में जोड़ा गया। ]
अनुच्छेद 277
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं निम्रतापूर्वक प्रस्तावित करता हूँ कि इस अनुच्छेद को पुनःसंख्यांक द्वारा अनुच्छेद 277 का खंड (1) किया जाए और इस प्रकार पुनः संख्यांकित उक्त अनुच्छेद में निम्नलिखित खंड जोड़ा जाए :
“(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के यथाशीघ्र पश्चात्, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।“
अनुच्छेद 277 एक पारिणामिक अनुच्छेद है। इसमें अधिकथित है कि राष्ट्रपति द्वारा की गई आपात उद्घोषणा के वित्तीय परिणाम क्या होंगे। अनुच्छेद के खंड (1) का कहना है कि प्रांतों और केन्द्र के बीच वित्तीय व्यवस्था विषयक उपबंध राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल में आदेश द्वारा, उपान्तरित किए जा सकेंगे। अब यह महसूस किया गया कि प्रांतों और केन्द्र के बीच वित्तीय व्यवस्था को उपान्तरित करने की यह पूर्ण और असीम शक्ति राष्ट्रपति को देना उचित नहीं है तथा यह कि संसद को भी इस विषय में अधिकार होना चाहिए। परिणामस्वरूप, अनुच्छेद 277 में खंड (2) जोड़ना प्रस्तावित है जिसके द्वारा उपबंध किया जाता है कि व्यवस्था को बदलने के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा किया गया कोई आदेश संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा। संसद ऐसी कार्रवाई करेगी जैसी वह ठीक समझे और उस पर कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति आबद्ध होगा।
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई : साधारण) : माननीय उपसभापति
महोदय, मैंने अपने माननीय मित्र पंडित कुंजरू द्वारा प्रस्तावित संशोधन पर यथासंभव बारीकी से ध्यान दिया है और मुझे यह कहते हुए अफसोस है कि मैं उनसे नजरें नहीं मिला सकता क्योंकि मैं यह महसूस करता हूँ कि व्यापक रूप से देखने पर उनका संशोधन बिल्कुल अनावश्यक दिखाई पड़ता है।
आइए, इस बारे में धारणा बनाएं कि प्रांतों और केन्द्र के बीच वित्तीय संबंध सामान्यतया क्या होने जा रहे हैं। मेरे विचार में, अनुच्छेदों से जो पहले ही पारित किए जा चुके हैं यह स्पष्ट है कि प्रांत सामान्य अनुक्रम में केन्द्र से धन लेंगे :
(1) अनुच्छेद 251 के अधीन आयकर के आगम से,
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 20 अगस्त, 1949, पृ. 520-23