अनुच्छेद 277 - Page 130

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(2) अनुच्छेद 253 के अधीन केन्द्रीय उत्पाद शुल्क का हिस्सा; और

(3) अनुच्छेद 255 के अधीन कतिपय अनुदान और राजकीय सहायता।

मैं जूट शुल्क की बात नहीं कर रहा हूँ क्योंकि इसका पृथक आधार है और उसे कानूनी तौर पर प्रत्याभूत किया गया है।

आइए, हम इस पर जानकारी ले लें कि मेरे द्वारा प्रस्तावित अनुच्छेद द्वारा क्या किया जाना प्रस्तावित है। यह अनुच्छेद प्रस्तावित करता है कि आपात उद्घोषणा किये जाने के बाद राष्ट्रपति को आयकर आगमों, उत्पाद शुल्कों और अनुदानों को जिन्हें केन्द्र अनुच्छेद 255 के अधीन कर रहा होगा, पुनराबंटित करने की शक्ति होनी चाहिए। मेरे द्वारा प्रस्तावित अनुच्छेद राष्ट्रपति को इन तीन शीर्षों के अंतर्गत आवंटनों को उपांतरित करने का विवेकाधिकार प्रदान करता है। इस प्रारूप अनुच्छेद की, जो प्रारूपण समिति द्वारा सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, यही स्थिति है।

अब, मेरे मित्र पंडित कुंजरू अपने संशोधन द्वारा क्या किया जाना प्रस्तावित करते हैं? यदि मैं उन्हें ठीक से समझ सका हूँ तो उनका इस बारे में प्रारूपण समिति से मतभेद नहीं है कि तीन मदों में से दो को जिनके प्रति मैंने निर्देश किया है, उपांतरित करने का पूर्ण विवेकाधिकार राष्ट्रपति पर छोड़ दिया जाए, इसका अर्थ यह है कि वे अनुच्छेद 255 के अधीन उत्पाद शुल्क के आगमों और केंद्र द्वारा मंजूर किए गए अनुदानों में से केन्द्र द्वारा प्रांतों को किए गए किसी आवंटन को उपांतरित करने का पूर्ण और पूरा विवेकाधिकार राष्ट्रपति पर छोड़ने के लिए तैयार हैं। यदि मैंने उन्हें सही समझा है तो यदि राष्ट्रपति आदेश द्वारा इस अंश को पूरी तरह समाप्त कर देता है जो उत्पाद शुल्क के आगमों और केन्द्र के अनुदानों में से सामान्य काल में, प्रांतों को देने के लिए केन्द्र आबद्ध है तो उन्हें कोई कठिनाई नहीं होगी।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू (संयुक्त प्रांत : साधारण) : मैंने ऐसा कुछ कभी नहीं

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कहा है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आपका संशोधन केवल आयकर तक सीमित है। यही बताने की मैं कोशिश कर रहा हूँ। अपने संशोधन के द्वारा आपका सुझाव यह नहीं है कि अनुच्छेद 255 के अधीन उत्पाद शुल्क के आगम या केन्द्र के अनुदानों के विषय में कोई भिन्न पद्धति होनी चाहिए।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : मैंने अपना संशोधन इस प्रारूप में क्यों ढाला है इसका कारण है। जहाँ तक किन्हीं करों के आगम का वितरण संसद द्वारा बनाई विधि पर निर्भर करता है वहाँ तक उस शक्ति को संसद से छीना नहीं जा सकता, लेकिन राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त नहीं है। किन्तु जहाँ तक आयकर का संबंध है, भारत