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114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निलम्बित रहने चाहिए अथवा बिल्कुल भी निलम्बित नहीं रहने चाहिए। दूसरे शब्दों में हमारे अधिकार अत्यंतिक होंगे, जो कभी न बदलेंगे न निलम्बित अथवा कम किये जायेंगे, अथवा क्या हमारे मूल अधिकार कुछ आपात स्थितियों के अधीन रखे जाएं। मैं समझता हूँ मैं यह सही कहता हूँ कि सदन के अधिकांश सदस्य इन अधिकारों को आपातकाल में कुछ समय के लिए निलम्बित करने की आवश्यकता महसूस करते हैं एक मात्र प्रश्न ऐसा करने के ढंग या उपायों का है।

अब यदि इस पर सहमत हैं कि आपातकाल में अधिकारों के निलम्बन के लिए उपबंध करना आवश्यक है तो दूसरा प्रश्न जो विधिसम्मत रूप से विचार के लिए उत्पन्न होता है वह यह है कि क्या अधिकारों को निलम्बित करने की शक्ति पूर्णतः राष्ट्रपति में निहित रहे अथवा उनका अवधारण संसद पर छोड़ दिया जाय। दूसरे देशों में इसके लिए क्या होता है, उसके बारे में मुझे भरोसा है कि इस सदन का प्रत्येक व्यक्ति सहमत होगा कि हमें अनुभव पर और दूसरे देशों के संविधानों के उपबंधों से ग्रहण करना चाहिए - स्थिति यह है। बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार के निलम्बन के संबंध में अंगरेजी कानून के अंतर्गत इस विषय पर कानून बनाया जाए। बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकारों को निलम्बित करने का अधिकार कार्यपालिका को नहीं है। यह ग्रेट ब्रिटेन की स्थिति है। अब संयुक्त राज्य की स्थिति पर आइए, हम देखते हैं कि जबकि कांग्रेस के बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट के निलम्बन समेत तथाकथित सांविधानिक गारन्टियों के विषय में शक्ति प्राप्त है। राष्ट्रपति को इस विषय से संबंधित शक्ति से सर्वथा वंचित नहीं रखा गया है। मैं विषय के विस्तृत इतिहास में जाना नहीं चाहता। लेकिन मैं सोचता हूँ मेरा यह कहना सही है कि जबकि यह शक्ति कांग्रेस में निहित है। फिर भी राष्ट्रपति में भी रिट को निलम्बित करने की वह शक्ति जिसे अंतरिम कहते हैं, निहित है। मेरे मित्र सर हिलाते हैं। लेकिन मैं समझता हूँ कि यदि राष्ट्रपति पर कोरविन कृत प्रामाणिक ग्रन्थ को देखें तो उन्हें पता चलेगा कि स्थिति यही है।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : क्या आप मुझे उन्हें बीच में रोकने देंगे? मुझे विश्वास

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है कि वे ओगस गवर्नमेंट ऑफ अमेरिका से परिचित होंगे। कदाचित वे इस पुस्तक को एक प्रामाणिक पुस्तक मानेंगे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, वह मात्र एक पुस्तक नहीं है। अमरीकन

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संविधान पर एक सौ पुस्तकें हैं। मैं उनमें से पचास से अवश्य परिचित हूँ।

पंडित हृदयनाथ कुंजरू : उनमें लिखा है कि सर्वोत्तम कानूनी राय यह है कि

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बंदी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार कांग्रेस में निहित है और राष्ट्रपति उनका प्रयोग वहाँ करेगा जहाँ सशस्त्र बल के कमान्डर-इन-चीफ के नाते इसे फौजी कार्रवाइयों की सुरक्षा के लिए आवश्यक समझते हैं।