अनुच्छेद 280 - Page 136

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, मेरा निवेदन है कि संयुक्त राज्य में, जहाँ

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कांग्रेस को शक्तियां प्राप्त हैं, राष्ट्रपति को भी, राज्य के कार्यपालक प्रमुख के नाते अंतरिम निलम्बन की शक्ति प्राप्त है।

अब, हमारा संविधान बनाने में हमने कम या अधिक अमरीकन पूर्वोदाहरण का अनुसरण किया है। संशोधन के द्वारा जो मैंने किया है, संसद में ऐसे विषय में कार्रवाई करने की शक्ति निहित हैं। हम भी राष्ट्रपति को सार्वजनिक गारन्टी के विषय में ऐसी कार्रवाई करने के लिए जैसी वह आवश्यक समझें, करने के लिए अंतरिम शक्ति देने का प्रस्ताव करता हूँ।

इसलिए, मसौदा अनुच्छेद की तुलना करने पर और संयुक्त राज्य की स्थिति की जो आप देखते हैं तुलना करने पर निश्चय ही इन दोनों में बहुत बड़ा अन्तर नहीं है। यहाँ भी राष्ट्रपति अपनी व्यक्तिगत हैसियत में कोई कार्यवाही नहीं करता। हमारे यहाँ और भी रक्षोपाय है जो अमरीकन संविधान में नहीं है जैसे, हमारे राष्ट्रपति कार्यपालिका की सलाह से मार्गदर्शित होंगे और हमारी कार्यपालिका संसद के अधिकार के अधीन होगी। इसलिए जहाँ तक गारन्टियों को निलम्बित करने की समस्त शक्तियों के निहित होने का प्रश्न है, मेरा निवेदन है कि हमारा प्रस्ताव सर्वथा अभिनव प्रस्ताव नहीं है जो या तो किसी पूर्वोदाहरण के निर्देश के बिना बना है अथवा जो किसी मर्यादाहीन योजनाकार ने बिना इस बात की चिन्ता किए बनाया है कि मूल अधिकारों का क्या होगा।

अब, इस प्रश्न पर विचार करने के पश्चात्, मैं श्री भार्गव के संशोधन संख्या 74 पर आता हूँ। मैं सोचता हूँ कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और इसीलिए मुझे इस विषय में ठीक-ठीक व्यवस्था की व्याख्या करनी चाहिए। उनका संशोधन वास्तव में अनुच्छेद 279 का हवाला देता है यद्यपि उन्होंने इसे अनुच्छेद 280 के संशोधन के लिए प्रस्तुत किया है। आपातकाल के उपबंधों के द्वारा राज्य को जो अधिकार मूल अधिकारों को निलम्बित करने की कार्यवाही करने के लिए मिले हैं, वे उद्घोषणा समाप्त होते ही समाप्त हो जाएंगे। मेरे विचार में यह वही है जो वे चाहते हैं जहाँ तक संशोधन संख्या 74 का संबंध है। मेरा निवेदन है कि यदि अनुच्छेद को ठीक से पढ़ा जाये तो वह ठीक वही है जो वे चाहते हैं। मैं उनका ध्यान अनुच्छेद 279 की ओर आकर्षित करता हूँ। वे देखेंगे कि वह अनुच्छेद आपात की शक्तियों के अधीन बने किसी कानून के अधीन की गई किसी बात की रक्षा नहीं करता। इसलिए कि मामला उनकी समझ में आ जाये, मैं दुबारा उनका ध्यान अनुच्छेद 227 की ओर आकर्षित करता हूँ। यदि वे दोनों की तुलना करें तो वे देखेंगे कि दोनों अनुच्छेदों में मौलिक अन्तर है। अनुच्छेद 227 वह अनुच्छेद है जो केन्द्र को आपातकाल में कुछ