118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इसके विपरीत विनिश्चय न हो इसको सहमति मान ली जाए? कठिनाई कहाँ है? संशोधन के बारे में मुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता।
एक माननीय सदस्य : अब एक बज गया है।
माननीय उपसभापति : हम इस अनुच्छेद को समाप्त करने जा रहे हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्री गुप्ता ने एक संशोधन पेश किया है जो
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श्री भार्गव के संशोधन संख्या 78 का संशोधन है। वे चाहते हैं कि निश्चित समय रखा जाए कि उद्घोषणा दो माह के भीतर संसद के सामने पेश की जाए। पंडित भार्गव के संशोधन में एक माह था। मैं सोचता हूँ यदि मैं भूल नहीं रहा हूँ और मेरा मूल प्रस्ताव है ’यथासंभव शीघ्र’। अच्छा, मैं नही जानता कि कोई इसे अन्तःकरण का मामला बनाना चाहते हैं और यदि इस मामले की गारंटी नहीं दी गई तो हम अनशन करने जा रहे हैं। मैं सोचता हूँ ’यथासंभव शीघ्र’ शब्दों को इस प्रकार रखा जाए कि मामला संसद के समक्ष एक माह के भीतर, दो माह के भीतर अथवा पंद्रह दिन के भीतर रख दिया जाए। यह बहुत लचीला पद है और इसलिए मेरा निवेदन है कि उपबंध जैसा मसौदे में है हालात के अनुसार ठीक है और मुझे आशा है कि सदन इसे स्वीकार करेगा।
* माननीय उपसभापति : मैं अब संशोधनों को सदन के समक्ष रखता हूँ।
[ सभी संशोधन, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के संशोधन को छोड़कर, वापिस ले लिए गए अथवा खारिज कर दिये गए। यथा संशोधित अनुच्छेद 280 संविधान में जोड़ा गया। ]
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (मुम्बई : साधारण) : श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है :
| vE | csMd | j |
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| eq | Ec | b |
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| kèk | kj. |
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संघ और राज्यों के लिए “कि अनुच्छेद 254 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद संघ और राज्यों के लिए
लोक सेवा आयोग रखा जाए : लोक सेवा आयोग
284 (1) इस अनुच्छेद के उपबंधों के अधीन रहते हुए संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग तथा प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा।
(2) दो या अधिक राज्य यह करार कर सकेंगे कि राज्यों के उस समूह के लिए एक ही लोक सेवा आयोग होगा तथा यदि उस उद्देश्य का संकल्प उन राज्यों में से प्रत्येक के विधानमंडल के सदन द्वारा अथवा जहाँ दो सदन हैं, वहाँ प्रत्येक सदन द्वारा पारित कर दिया जाता है तो, संसद उन राज्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 22 अगस्त, 1949, पृ. 556