अनुच्छेद 280 - Page 140

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के लिए विधि द्वारा संयुक्त लोक सेवा आयोग (जो इस अध्याय में ’संयुक्त आयोग’ के नाम से निर्दिष्ट है) की नियुक्ति का उपबंध कर सकेगी।

(2क) उपरोक्त विधि में ऐसे प्रासंगिक तथा आनुषंगिक उपबंध भी अंतर्विष्ट हो सकेंगे जो इस अनुच्छेद के उपखंड (2) के प्रयोजनों को सिद्ध करने के लिए आवश्यक या वांछनीय हों।

(3) यदि किसी राज्य का राज्यपाल अथवा राजप्रमुख, संघ के लोक सेवा आयोग से ऐसा करने की प्रार्थना करे तो राष्ट्रपति के अनुमोदन से वह उस राज्य की सब या किन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करना स्वीकार कर सकेगा।

(4) यदि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, तो इस संविधान में संघ के लोक सेवा आयोग अथवा किसी राज्य के लोक सेवा आयोग के निर्देशों को ऐसे आयोग के प्रति निर्देश समझ जाएगा जो प्रश्नास्पद किसी विशेष विषय के बारे में यथास्थित संघ की अथवा राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो।“

यह अनुच्छेद स्वतः स्पष्ट है और मैं नहीं समझता कि इस अनुच्छेद में किसी बिन्दु को स्पष्ट करने के लिए कोई मत व्यक्त करना आवश्यक है। इसलिए मैं अपनी टिप्पणी को उस स्थिति तक सुरक्षित करता हूँ जब तक मुझे किसी आलोचना का उत्तर देने के लिए पुकारा नहीं जाता।

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संसद द्वारा ऐसी किसी विधि के बारे में उपबंध क्यों समाविष्ट किया जाता है और उन उपबंधों में शासक (राजा) का जिक्र क्यों किया जाता है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि अपने मित्र साहू को मैं सही समझता हूँ तो वे जानना चाहते हैं कि हमने संसद के द्वारा कानून बनाने के लिए उपबंध क्यों समाविष्ट किया। वे समझ लेंगे कि मूलभूत सिद्धांत है कि प्रत्येक राज्य का अपना पृथक लोक सेवा आयोग होना चाहिए। लेकिन यदि प्रशासनिक अथवा वित्तीय उद्देश्यों के कारण प्रत्येक राज्य के लिए अपना लोक सेवा आयोग रखना संभव नहीं है तो दो राज्यों के लिए यह शक्ति खुली है कि वे एक संकल्प के द्वारा केन्द्र को शक्ति प्रदत्त करे कि वह संयुक्त क्षेत्रीय आयोग की व्यवस्था ऐसे दो राज्यों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए करे जो, जैसा मैंने कहा, जो या तो प्रशासनिक अथवा वित्तीय कारणों से ऐसी स्थिति में नहीं है कि अपने लिए पृथक स्वतंत्र आयोग रख सके। स्पष्ट रूप से, जब इस प्रकार की शक्ति केन्द्र पर डाली जाती है तो ऐसा होना चाहिए कि वह शक्ति संसद के द्वारा बनाये कानून से विनियमित की जाए और दो राज्यों के लिए संयुक्त आयोग शुद्ध कार्यपालक आदेश से बनाने के लिए राष्ट्रपति को खुली छूट न