अनुच्छेद 280 - Page 141

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दी जाए। वह उस उद्देश्य के लिए कि दो राज्यों की सेवा करने के लिए ऐसे आयोग के गठन को विनियमित करने की शक्तियां संसद को दी गई हैं।

श्री लक्ष्मी नारायण साहू : दूसरा मुद्दा है कि ’शासक’ का जिक्र क्यों किया गया है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्योंकि हो सकता है भाग III की रियासत माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्योंकि हो सकता है भाग

अपने लिए स्वतंत्र लोक सेवा आयोग रखना अनावश्यक समझे। परिणामस्वरूप, भाग III की रियासत के लिए द्वार खुले रखने चाहिए, यदि वह राज्य भाग I के राज्य के साथ राष्ट्रपति को संयुक्त निवेदन करते हैं कि संयुक्त आयोग नियुक्त कर दिया जाए। यही कारण है कि ’शासक’ अनुच्छेद को उपबंध में सम्मिलित किया गया है।

श्री आर. के. सिधवा (मध्य प्रांत एवं बरार : साधारण) : मैं एक स्पष्टीकरण चाहता

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हूँ। खण्ड (3) में यह कहा गया है ’राष्ट्रपति के अनुमोदन से, राज्य की सभी अथवा किसी आवश्यकता की पूर्ति करनेके लिए सहमत होता है’। क्या मैं जान सकता हूँ कि कोई स्थानीय संस्था सेवा आयोग की सेवायें उपयोग करना चाहे तो क्या उसे अनुमति होगी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, यहाँ एक पृथक अनुच्छेद है जो उपबध करता है कि यदि स्थानीय प्राधिकरण अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति लोक सेवा आयोग से कराना चाहता है, तो संसद के लिए यह संभव होगा कि लोक सेवा आयोग को ऐसा प्राधिकार प्रदान करे कि ऐसे स्थानीय प्राधिकरण की आवश्यकताओं की पूर्ति भी हो।

(संशोधन संख्या 2 पेश नहीं हुआ।)

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता, यहाँ कुछ ऐसा है जिससे कि मेरा बोलना आवश्यक हो।

[ सभी संशोधन, सिवाय डॉ. अम्बेडकर के संशोधन के, खारिज किए गए। अनुच्छेद 284 जैसा संशोधित है, संविधान में जोड़ा गया। ]

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* ख्., सीएडी, खंड IX, दिनांक 22 अगस्त, 1949, पृ. 571