अनुच्छेद 285 - Page 143

122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(2) लोक सेवा आयोग का सदस्य, अपने पद ग्रहण की तारीख से 6 वर्ष की अवधि तक, अथवा यदि वह संघ आयोग है तो पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त होने तक, तथा यदि वह राज्य-आयोग या संयुक्त आयोग है तो, साठ वर्ष की आयु को प्राप्त होने तक, जो भी इनमें से पहले हों, अपना पद धारण करेगाः

परन्तु -

(क) लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य, यदि वह संघ-आयोग या संयुक्त

आयोग है तो राष्ट्रपति को, तथा यदि वह राज्य-आयोग है तो राज्य के

राज्यपाल या राजप्रमुख को, सम्बोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा

पद को त्याग सकेगा।

(ख) लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य अपने पद से अनुच्छेद 285 के खण्ड

(1) अथवा खण्ड (3) में उपबंधित रीति से हटाया जा सकेगा।

(3) कोई व्यक्ति जो लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी अवधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति के लिए अपात्र होगा। लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना या निलम्बित किया जाना 285क. (1) इस अनुच्छेद के खण्ड (3) के उपबंधों के अधीन रहते हुए लोक सेवा आयोग का सभापति अथवा अन्य कोई सदस्य अपने पद से केवल राष्ट्रपति द्वारा कदाचार के आधार पर दिए गए उस आदेश पर ही हटाया जाएगा, जो कि उच्चतम न्यायालय से राष्ट्रपति द्वारा पृच्छा किए जाने पर उस न्यायालय किसी सदस्य का हटाया

जाना या निलम्बित किया

जाना

द्वारा अनुच्छेद 121 के अधीन उसके लिए विहित प्रक्रिया के अनुसार की गई जांच पर, उस न्यायालय द्वारा किए गए इस प्रतिवेदन के पश्चात् कि यथास्थिति सभापति या ऐसे किसी सदस्य को, ऐसे किसी आधार पर हटा दिया जाए, दिया गया है।

(2) आयोग के अध्यक्ष या अन्य किसी सदस्य को, जिसके संबंध में खण्ड (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय से पृच्छा की गई है; राष्ट्रपति, यदि वह संघ आयोग या संयुक्त आयोग है तथा राज्यपाल या राजप्रमुख यदि वह राज्य-आयोग है, उसको पद से तब तक के लिए निलम्बित कर सकेगा जब तक कि ऐसी पृच्छा की गई बात पर उच्चतम न्यायालय के प्रतिवेदन के मिलने पर राष्ट्रपति अपना आदेश न दें।

(3) खण्ड (1) में किसी बात के होते हुए भी यदि यथास्थिति लोक सेवा आयोग का सभापति या कोई दूसरा सदस्यः

(क) दिवालिया न्यायनिर्णीत हो जाता है, अथवा

(ख) अपनी पदावधि में अपने पद के कर्त्तव्यों से बाहर कोई वैतनिक नौकरी

करता है, अथवा

और यहाँ मैं तीसरा (ग) सम्मिलित करना चाहता हूँ :