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(ग) राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक दौर्बलयता के कारण अपने
पद पर रहने के लिए अयोग्य है तो सभापति या ऐसे अन्य सदस्य को
राष्ट्रपति अपने आदेश से अपने पद से हटा सकेगा।
(4) इस अनुच्छेद के खण्ड (1) के उद्देश्य के लिए लोक सेवा आयोग का सभापति या अन्य कोई सदस्य भारत सरकार के या राज्य की सरकार के द्वारा या और से की गई किसी संविदा या करार में, निगमित समवाय के सदस्य के नाते तथा उसके अन्य सदस्यों के साथ के सिवाय, किसी प्रकार से भी, संयुक्त पर हितसंबंध है या हो जाता है अथवा किसी प्रकार से उसके लाभ में अथवा तदुत्पन्न किसी फायदे या उपलब्धि में भाग लेता है तो वह खण्ड (1) के प्रयोजनों के लिए कदाचार का अपराधी समझा जाएगा।
285(ख) संघ आयोग या संयुक्त आयोग के बारे में राष्ट्रपति तथा राज्य आयोग के
आयोग के सदस्यों
तथा कर्मचारीवृन्द की सेवाओं की शर्तों के बारे
में विनियम बनाने की
बारे में राज्य का राज्यपाल या राजप्रमुख विनियमों द्वाराः
(क) आयोग के सदस्यों की संख्या तथा उनकी सेवाओं की शर्तों का निर्धारण कर सकेगा, तथा
(ख) आयोग के कर्मचारीवृन्द के सदस्यों की संख्या के तथा उनकी सेवा की शर्तों के संबध्ां में उपबंध कर सकेगा ः
शक्ति
परन्तु, लोक सेवा आयोग के सदस्य की सेवा की शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात, अलाभकारी परिवर्तन न किया जाएगा।
285(ग) पद पर न रहने पर :
(क) संघ लोक सेवा आयेग का अध्यक्ष, भारत सरकार
या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी और आयोग के सदस्यों द्वारा नौकरी के लिए अपात्र होगा; आयोग के सदस्यों द्वारा
पदों के धारण के संबंध (ख) राज्य के लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष संघ पदों के धारण के संबंध
में वर्जन लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में में वर्जन
अथवा किसी अन्य राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नौकरी के लिए पात्र न होगा;
(ग) संघ लोक सेवा आयोग अध्यक्ष के अतिरिक्त कोई अन्य सदस्य संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नौकरी के लिए पात्र न होगा;