124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(घ) किसी राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष से अतिरिक्त अन्य कोई
सदस्य संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य के रूप
में अथवा उसी या किसी अन्य, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप
में नियुक्त होने का पात्र होगा; किन्तु भारत सरकार के या किसी राज्य
की सरकार के अधीन किसी अन्य नौकरी के लिए पात्र न होगा।
श्रीमन्, ये अनुच्छेद जो लोक सेवा आयोग उसके कार्यालय की कालावधि, योग्यता एवं निर्योग्यता, हटाया जाना और निलम्बन के बारे में हैं। मैं संक्षेप में सदन को उन विषयों के बारे में जिनका समावेश यहाँ हुआ है उन मुख्य विषयों के बारे में जो इन अनुच्छेदों में समाविष्ट है स्पष्ट करना चाहता हूँ।
प्रथम बिन्दु लोक सेवा आयोग की काल अवधि के बारे में है। वह अनुच्छेद 285 में है। अनुच्देद में रखे गए उपबंधों के अनुसार लोक सेवा आयोग के सदस्य की कालावधि 6 वर्ष निश्चित है अथवा संघ लोक सेवा आयोग के बारे में जब तक 65 वर्ष की उम्र तक नहीं पहुंचता और राज्य आयोग के बारे में जब तक 60 वर्ष की आयु तक नहीं पहुंचता। पदावधि के बारे में भी यही है।
इसके बाद मैं लोक सेवा आयोग के सदस्यों के हटाये जाने पर आता हूँ। यह विषय अनुच्छेद 285क में है। अनुच्छेद के उपबंधों के अंतर्गत लोक सेवा आयोग का सदस्य दुर्व्यवहार सिद्ध होने पर राष्ट्रपति द्वारा हटाये जाने के दायित्वाधीन है। वह स्वतः नियोग्यता के कारण भी हटाये जाने के दायित्वाधीन है। स्वतः निर्योग्यता तीन स्थितियों में होती है :एक, दिवालियापन। दूसरा, किसी अन्य नौकरी में लग जाना और तीसरी है दिमाग व शरीर की दुर्बलता। दुर्व्यवहार के बारे में उपबंध अजीब है। माननीय सदन को याद होगा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की दशा में अथवा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की दशा में उस अनुच्छेद में जिसे हम पहले ही पारित कर चुके हैं कि वे अच्छे व्यवहार के दौरान पद पर रहते हैं और वह उस समय तक पद से हटाए जाने के दायित्वाधीन नहीं होंगे, जब तक संसद के दोनों सदन उस निमित्त संकल्प पारित नहीं करते। यह महसूस किया गया है कि लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाने के लिए इस प्रकार के सख्त व कठोर उपबंध अनावश्यक है। परिणामस्वरूप, इस अनुच्छेद में यह व्यवस्था की गई है कि भारत सरकार के कानून में रखे गए उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के हटाने के उपबंध लोक सेवा आयोग के सदस्यों को ऐसी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए उपयुक्त है। मैं सोचता हूँ कि सदन को याद होगा कि भारत सरकार अधिनियम के उपबंध में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के हटाने के लिए आवश्यक है एक जांच जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के संबंध में फेडरल न्यायालय न्यायाधीशों द्वारा