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श्रीमन्, मेरा ध्यान अनुच्छेद 285क के मेरे संशोधन की साइक्लोस्टाइल प्रति में इस तथ्य की ओर आकर्षित किया गया है कि शब्द होने चाहिए ‘’किसी वेतनभोगी नौकरी में’’। मुझे आशा है कि गलती सुधार ली जाएगी।
जैसा मैंने पंडित कुंजरू से कहा प्रारूपण समिति मामले को देखेगी और यदि यह महसूस करती है कि बदलाव करने के आधार हैं तो सदन की आज्ञा से वह संशोधन लेकर आएंगे जिससे स्थिति सुधर जाए।
माननीय सभापति : मैं सबसे पहले संशोधनों को मत के लिए रखूंगा :
प्रश्न है कि :
“कि ऊपर संशोधन संख्या 3 में, प्रस्तावित अनुच्देद 285 के खण्ड (1) के उपबंध में, ’आधे’ शब्द के स्थान पर ’एक तिहाई’ शब्द रखा जाए।
श्री जसवंत राय कपूर : इसके स्थान पर मैं डॉ. अम्बेडकर के सुझाव को स्वीकार करता हूँ जो लगभग ‘’जैसे आधे होने चाहिए’’।
माननीय सभापति : अब मैं उसे मतदान के लिए रखूंगा। प्रश्न है :
’कि उपर्युक्त संशोधन संख्या 3 में प्रस्तावित अनुच्छेद 285 के खण्ड (1) के परन्तुक में ’कम से कम आधे’ शब्दों के स्थान पर ’आधे के लगभग’ शब्द रखे जाएं।
[ संशोधन स्वीकार हुआ। अनुच्छेद 285 संशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया। ]
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अनुच्छेद 286 से 288क
* माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 286 और पश्चात्वर्ती अनुच्छेदों पर विचार करेंगे।
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (मुम्बई : सामान्य) : श्रीमन, आपकी इजाजत
से क्या मैं संशोधन संख्या 12, 16, 17 और 19 एक साथ पेश कर सकता हूँ? यह सभी एक ही उद्देश्य से संबंधित हैं। यहाँ एक आम बहस होनी चाहिए और तब आप प्रत्येक संशोधन को पृथक रख सकते हैं।
माननीय सभापति : हाँ, मैं सहमत हूँ।
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 23 अगस्त, 1949, पृ. 598