अनुच्छेद 286 से 288 क - Page 151

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

“कि अनुच्छेद 286 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएः

लोक सेवा आयोगों के 286(1)- (1) संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों का यह

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कृत्य कर्तव्य होगा कि वे क्रमशः संघ की सेवाओं और राज्य

की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाओं का संचालन करें।

(2) यदि संघ लोक सेवा आयोग से कोई दो या अधिक राज्य ऐसा करने का अनुरोध करते हैं तो उसका यह भी कर्तव्य होगा कि वह ऐसी किन्हीं सेवाओं के लिए, जिनके लिए विशेष अर्हताओं वाले अभ्यर्थी अपेक्षित हैं, संयुक्त भर्ती की योजना बनाने और उनका प्रवर्तन करने में उन राज्यों की सहायता करे।

(3) यथास्थिति, संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श लेंगेः

(क) सिविल सेवाओं में और सिविल पदों के लिए भर्ती की पद्धतियों से संबंधित

सभी विषयों पर;

(ख) सिविल सेवाओं और पदों पर नियुक्ति करने में तथा एक सेवा से दूसरी

सेवा में प्रोन्नति और पदों पर नियुक्ति करने में तथा एक सेवा से

दूसरी सेवा में प्रोन्नति और अंतरण करने में अनुसरण किए जाने वाले

सिद्धांतों पर और ऐसी नियुक्ति, प्रोन्नति या अंतरण के लिए अभ्यर्थियों

की उपयुक्तता पर;

(ग) ऐसे व्यक्ति पर, जो भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार की सिविल

हैसियत से सेवा कर रहा है, प्रभाव डालने वाले, सभी अनुशासनिक विषयों

पर, जिनके अंतर्गत ऐसे विषयों से संबंधित अभ्यावेदन या याचिकाएं हैं;

(घ) ऐसे व्यक्ति द्वारा उसके संबंध में, जो भारत सरकार या किसी अन्य राज्य

की सरकार के अधीन सिविल हैसियत से सेवा कर रहा है या कर चुका

है, इस दावे पर कि अपने कर्तव्य के निष्पादन में किए गए या किए

जाने के लिए तात्पर्यित कार्यों के संबंध में उसके विरुद्ध संस्थित विधिक

कार्यवाहियों की प्रतिरक्षा से उसके द्वारा उपगत खर्च का, यथास्थिति,

भारत की संचित निधि में से या राज्य की संचित निधि में से संदाय

किया जाना चाहिए;

(ड.) भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार या भारत में क्राउन के अधीन

सिविल हैसियत में सेवा करते समय किसी व्यक्ति की हुई क्षतियों के

बारे में पेंशन अधिनिर्णीत किए जाने के लिए किसी दावे पर और ऐसे