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अधिनिर्णय की रकम पर, परामर्श किया जाएगा और इस प्रकार उसे
निदेशित किए गए किसी विषय पर तथा ऐसे किसी अन्य विषय पर,
जिसे, यथास्थिति, राष्ट्रपति या उस राज्य का राज्यपाल उसे निर्देशित
करे, परामर्श देने का लोक सेवा आयोग का कर्तव्य होगा :
परंतु अखिल भारतीय सेवाओं के संबंध में तथा संघ के कार्यकलाप से संबंधित
अन्य सेवाओं और पदों के संबंध में भी राष्ट्रपति तथा राज्य के कार्यकलाप से
संबंधित अन्य सेवाओं और पदों के संबंध में राज्यपाल उन विषयों को विनिर्दिष्ट
करने वाले विनियम बना सकेगा जिन्में साधारणतया या किसी विशिष्ट वर्ग के
मामले में या किन्हीं विशिष्ट परिस्थितियों में लोग सेवा आयोग से परामर्श किया
जाना आवश्यक नहीं होगा।
(4) इस अनुच्छेद के खंड (3) की किसी बात से यह अपेक्षा नहीं होगी कि लोक सेवा आयोग से उस रीति के संबंध में, परामर्श किया जाए जो संघ या राज्य के पिछड़ी जाति के नागरिकों के लिए आरक्षित नियुक्तियों और पदों से संबंधित है।
(5) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा खंड (3) के परंतुक के अधीन बनाए गए सभी विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र प्रत्येक सदन के समक्ष कम से कम चौदह दिन के लिए रखे जाएंगे और निरसन या संशोधन द्वारा किए गए ऐसे उपांतरणों के अधीन होंगे जो संसद् के दोनों सदन या उस राज्य के विधानमंडल का या दोनों सदन उस सत्र में करें जिसमें वे इस प्रकार रखे गये हैं।
287, के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए : लोक सेवा आयोगों के अनुच्छेद 287 “संसद् द्वारा या किसी राज्य के विधानमंडल लोक सेवा आयोगों के
कृत्यों का विस्तार करने द्वारा बनाया गया कोई अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग कृत्यों का विस्तार करने
की शक्ति या राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा संघ की या राज्य की की शक्ति
सेवाओं के संबंध में और किसी स्थायी स्थानीय प्राधिकारी या विधि द्वारा गठित अन्य निगमित निकाय या किसी लोक संस्था की सेवाओं के संबंध में भी अतिरिक्त कृत्यों के प्रयोग के लिए उपबंध कर सकेगा।“
लोक सेवाओं के व्यय 288 अनुच्छेद के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा लोक सेवाओं के व्यय
जाएः
- संघ या राज्य लोक सेवा आयोग के व्यय, जिनके अंतर्गत आयोग के सदस्यों या कर्मचारीवृंद को या उनके संबंध में देय कोई वेतन, भत्ते और पेंशन यथास्थिति, भारत की संचित निधि या राज्य की संचित निधि पर भारित होंगे।“
“कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 3075 के स्थान पर निम्नलिखित