अनुच्छेद 286 से 288 क - Page 153

132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रखा जाएः

“कि अनुच्छेद 288 के पश्चात् निम्नलिखित नया अनुच्छेद जोड़ा जाएः- लोक सेवा आयोग के 288क. (1) संघ लोक सेवा आयोग का कर्त्तव्य होगा कि लोक सेवा आयोग के

प्रतिवेदन राष्ट्रपति को आयोग द्वारा किए गये काम के बारे में प्रतिवर्ष प्रतिवेदन

प्रतिवेदन दे, तथा ऐसे प्रतिवेदन प्राप्त होने पर उन मामलों के

बारे में, यदि कोई हो, जिनमें आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गयी थी ऐसी अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाले ज्ञापन के सहित उस प्रतिवेदन की प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।

(2) राज्य आयोग का यह कर्त्तव्य होगा कि राज्य के राज्यपाल या राजप्रमुख की आयोग द्वारा किये गये काम के बारे में प्रतिवर्ष प्रतिवेदन दे तथा संयुक्त आयोग का कर्त्तव्य होगा कि ऐसे राज्यों में से प्रत्येक के, जिनकी आवश्यकताओं की पूर्ति संयुक्त आयोग द्वारा की जाती है, राज्यपाल या राजप्रमुख को इस राज्य के संबंध में आयोग द्वारा किये गये काम के बारे में प्रति वर्ष प्रतिवेदन दे तथा इनमें से प्रत्येक व्यवस्था में ऐसे प्रतिवेदन प्राप्त होने पर यथास्थिति राज्यपाल या राजप्रमुख उन मामलों के संबंध में, यदि कोई हो, जिनमें कि आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गयी थी, ऐसी अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करने वाले ज्ञापन सहित उस प्रतिवेदन की प्रति राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा।

ये अनुच्छेद स्वयं स्पष्ट हैं और मैं नहीं समझता कि इस स्तर पर मेरे लिए कोई बिन्दु लाने के लिए टिप्पणी करना आवश्यक है क्योंकि बिन्दु बहुत साधारण हैं। इसलिए अन्त तक मैं अपनी टिप्पणी सुरक्षित करता हूँ जब बहस के बाद मेरे लिए उठाये गये कुछ बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण देना आवश्यक होगा।

श्रीमान् मेरा प्रस्ताव है -

* माननीय सभापति - डॉ. अम्बेडकर।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति महोदय, मेरे मित्र श्री अनंतशयनम्

vE csMd j

अयंगर और मेरे मित्र कुंजरू के भाषणों के पश्चात् बहुत से उठाये गये बिन्दुओं पर उत्तर में कहने के लिए मेरे लिए बहुत थोड़ा छोड़ा गया है। श्री जसपत राय कपूर ने कहा कि उप-खण्ड (2) अनावश्यक है। मैं उनसे सहमत नहीं हूँ क्योंकि खण्ड (2) उस मामले के बारे में है जो मूल अनुच्छेद 284 में है। मैं सोचता हूँ कि दोनों

खण्डों का बनाये रखना आवश्यक है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 23 अगस्त, 1949, पृ. 630