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एक मात्र मुद्दा जिस पर मेरे लिए कुछ कहने के लिए शेष रहता है वह प्रश्न है जिस पर अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्ग के बारे में है। मैं सोचता हूँ, मुझे यह कहना चाहिए कि उनके लिए कुछ बहुत व्यवस्था, दोनों, अनुच्छेद 296 जिस पर हम बाद में विचार करेंगे और अनुच्छेद 10 में लाभ हित सुरक्षित करने के लिए की जा चुकी है जिन्हें अनुसूचित जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ तथा पिछड़ा वर्ग कहा जाता है। मैं नहीं समझता कि उपबन्ध करने से कोई उद्देश्य पूरा होगा जबकि एक सदस्य जिसे अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति अथवा एक सदस्य पिछड़ा वर्ग कहा जाएगा, नियुक्त करना राष्ट्रपति के लिए आवश्यक होगा। श्री ए. वी. ठक्कर (सौराष्ट्र) : अन्य पिछड़ी जातियाँ?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : लोक सेवा आयोग के सदस्य का कर्त्तव्य
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर :
सामान्य है वह वहाँ किसी वर्ग विशेष के हित संरक्षित करने के लिए नहीं हो सकता। वह अपना मस्तिष्क यह जानने के सामान्य प्रश्न पर लगायेगा कि कौन उम्मीदवार उत्तम और सबसे अधिक कार्यक्षमता वाला है। वास्तविक संरक्षण का तरीका एक है जिसे अपनाया जा चुका है जैसे मंत्रिमंडल को निश्चित कोटा इन वर्गों के लिए भरने की आज्ञा देना। मुझसे यह भी पूछा गया है कि मैं पिछड़ा वर्ग की परिभाषा करूं। अच्छा, मैं सोचता हूॅ “पिछड़ा वर्ग“ शब्द जहाँ तक इस देश का प्रश्न है, प्रायः प्रारंभिक है, मैं नहीं सोचता कि मैं जानता हूँ कि पिछड़ा वर्ग कौन हैं इसलिए मैं सोचता हूँ कि मामले को वैसा ही छोड़ दिया जाए जैसा इस संविधान में किया जा चुका है, आयोग के लिए भी, जो समुदाय की दशा की जांच करने, और यह निश्चित करने के लिए कि इस देश में पिछड़ा वर्ग माने जाने वाले कौन हैं, नियुक्त किया गया है।
श्री ए. वी. ठक्कर : क्या मैं पूछ सकता हूँ कि ऐसा होने में बहुत से वर्ष नहीं लगेंगे?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, लेकिन इस समय, किसी प्रान्तीय सरकार
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पर कोई रूकावट नहीं है उनके लिए उपबन्ध बनाने के लिए, जिनको पिछड़ा वर्ग कहा जाता है उनको अनुच्छेद 10 के द्वारा पूर्णतः स्वतंत्र छोड़ दिया गया है। इसलिए मैं निवेदन करता हूँ कि यहाँ कोई डर नहीं है कि नौकरियों में पिछड़ा वर्ग अथवा अनुसूचित जातियों के हित अनदेखे छोड़ दिए जायेंगे। जैसा मेरे मित्र पंडित कुंजरू ने कहा है, मेरे द्वारा प्रस्तुत किये गये अनुच्छेद मसौदा अनुच्छेदों से कहीं अधिक सुधरे हुए हैं। यदि मुझे अपने लिए कहने की इजाजत हो, हमने कनेडियन कानून और आस्ट्रेलियन कानून में बहुत से अनुच्छेदों का गहन अघ्ययन किया है और हमें मध्यम मार्ग ढूंढने में सफलता मिली है। आशा है सदन को स्वीकार करने में कोई