अनुच्छेद 292 - Page 155

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कठिनाई नहीं होगी।

[ अनुच्छेद 286, जैसा डॉ. अम्बेडकर ने प्रस्ताव किया था स्वीकार नहीं किया गया और संविधान में नहीं जोड़ा गया ]

अनुच्छेद 292

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा प्रस्ताव है कि अनुच्छेद 292 के स्थान

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पर निम्नलिखित रखा जाए :

‘‘292 (1) लोक सभा में सीटों का आरक्षण होगा, -

(क) अनुसूचित जातियों के लिए;

(ख) असम के आदिम जाति क्षेत्रों में अनुसूचित आदिम जातियों को छोड़कर जनजातियों के लिए;

लोक सभा में अनुसूचित (ग) असम के स्वायत्तशासी जिलों में अनुसूचित जन लोक सभा में अनुसूचित

जातियों के लिए सीटों (2) इस अनुच्छेद के खण्ड (1) के अधीन अनुसूचित जाति व अनुसूचित जन जातियों के लिए सीटों

का आरक्षण जातियों या अनुसूचित जन-जातियों के लिए किसी राज्य का आरक्षण

में रक्षित रखे गये स्थानों की संख्या का अनुपात लोक सभा में उस राज्य को बांट में दिए गये स्थानों की समस्त संख्या से यथाशक्य वही होगा जो यथास्थिति उस राज्य की अनुसूचित जातियों की, अथवा उस राज्य की या उस राज्य के भाग में की अनुसूचित जन-जातियों की, जिनके सम्बन्ध में वह स्थान इस प्रकार रक्षित हैं, जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की समस्त जनसंख्या से है।“

यह अनुच्छेद 292 इस मामले में परामर्श समिति के फैसलों की हूबहू पुनरावृत्ति है और मैं नहीं समझता कि कोई व्याख्या आवश्यक है।

माननीय सभापति : यह उस फैसले को दर्शाता है जो इस सदन की दूसरी बैठक में लिया गया था जब हमने परामर्श समिति के प्रतिवेदन पर विचार किया था। यह उस समय लिए गये फैसले को इस दशा में रखता है।

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (मुम्बई-साधारण) : माननीय निकोलस राय

के नाम पर लगे संशोधन के बारे में मैं सुझाव देने जा रहा था कि स्पष्टीकरण

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 23 अगस्त, 1949, पृ. 633