136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समय उठाये गये और बहुत से संशोधन मेरे विचार में, इस अनुच्छेद की विषय-वस्तु के संदर्भ में बिल्कुल असंगत है। अच्छा होता यदि उनको उस समय उठाया गया होता जब हम चुनाव विधियों पर बहस करेंगे और चुनाव क्षेत्र बनाएंगे। इसलिए मैं इस प्रक्रम पर उन पर चर्चा करना नहीं चाहता।
केवल तीन बिन्दु जरूरी हैं जिनका मैं उत्तर देना जरूरी समझता हूँ। पहला बिन्दु है जिसे श्री लश्कर ने अपने संशोधन द्वारा उठाया है। इनका संशोधन “असम में अनुसूचित जातियों की सुरक्षा, शब्दों को समावेश करने के बारे में है। मैं यह समझने में बिल्कुल असफल हूँ कि इन शब्दों के समावेश से उनका क्या आशय है। यदि ये शब्द समाविष्ट कर दिये गये होते तो इसका अर्थ होगा कि असम में अनुसूचित जातियाँ प्रतिनिधित्व लेने की अधिकारी नहीं होती जिसे इस अनुच्छेद के द्वारा केन्द्रीय संसद के निम्न सदन में दिए जाने का प्रस्ताव है। क्योंकि यदि ’असम में अनुसूचित जातियों की सुरक्षा’ उसी प्रकार रहते हैं बिना किसी अन्य उपबंध के तो मेरी समझ में नहीं आता कि असम की अनुसूचित जातियों को प्रतिनिधित्व के अधिकार से वंचित करने के अतिरिक्त, जो इनको दिए जा रहे हैं; इसके अन्य क्या परिणाम होंगे? यदि मैं उनको सही समझता हूँ तो वह मामला, जिसे उन्होंने उठाया है ठीक प्रकार से संविधान के अनुच्छेद 67 (ख) से संबंधित है जिसे पहले ही पारित किया जा चुका है। उस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि विधानमंडल में प्रतिनिधित्व का अनुपात आवादी से निश्चय ही संबंधित होना चाहिए। उसमें यह लिखा गया है कि केन्द्र के निम्न सदन में प्रतिनिधित्व 7,50,000 व्यक्तियों के लिए एक प्रतिनिधि से कम न होगा अथवा 5,00,000 की जनसंख्या के लिए एक प्रतिनिधि से अधिक नहीं होगा। वे जो कुछ कह रहे थे उसके अनुसार - और मुझे मान लेना चाहिए कि मेरे लिए यह पूर्णतः असंभव था कि मैं उसे सुनूं जो वे कह रहे थे - लेकिन यदि मैंने इसका उद्देश्य समझा होता, तो वह इस धारणा के प्रतीत होते हैं कि सिलहट जिले के विभाजन के कारण अनुसूचित जातियों की असम में जनसंख्या बहुत कम हो गई है और वहाँ ऐसी कोई संख्या नहीं होनी चाहिए जैसी हमने लिखी है जैसे 7,50,000 अथवा 5,00,000 जिससे ये सोचते हैं कि असम की अनुसूचित जातियाँ कोई प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं करेंगी। लेकिन मैं उन्हें कहना चाहता हूँ कि अनुच्छेद 67(5) (ख) का उपबंध अनुसूचित जातियों पर लागू नहीं होता। यह चुनाव क्षेत्र पर लागू होता है जिसका अर्थ है कि यदि एक चुनाव क्षेत्र में 7,50,000 संख्या है तो एक सीट होगी। यह हो सकता है कि उस चुनाव क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या बहुत कम हो। लेकिन वह परिसीमन समिति को अथवा संसद को उस विशेष क्षेत्र में अनुसूचित जातियों को एक सीट देने से नहीं रोकेगी। अतः उनका भय मेरे फैसले में निराधार है।