अनुच्छेद 295-क - Page 160

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(5) शिलांग के छावनी व नगर क्षेत्र से मिलकर बने हुए निर्वाचन-क्षेत्र को छोड़कर असम राज्य के किसी स्वशासी जिले के लिए आरक्षित स्थानों के निर्वाचन-क्षत्रों में उस जिले के बाहर का कोई क्षेत्र समाविष्ट न हो।

(6) कोई व्यक्ति, जो असम राज्य के किसी स्वशासी जिले की अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं है, उस राज्य की विधानसभा के लिए छावनी और नगर क्षेत्र से मिलकर बने हुए निर्वाचन-क्षेत्र को छोड़ कर उस जिले के किसी निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित होने का पात्र न होगा।

यह अनुच्छेद हूबहू वही है जो मूल अनुच्छेद के प्रारूप संविधान में है। मात्र संशोधन यह है कि मुसलमानों और ईसाइयों के लिए स्थानों के आरक्षण के लिए उपबन्ध अनुच्छेद 294 के खण्ड (1) में छोड़ दिया गया है वह इस सभा द्वारा इस विषय पर लिए गये फैसले के अनुसार है।

अनुच्छेद 295-क

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन् प्रस्तावित करता हूँ :

अनुसूचित जातियों और

अनुसूचित जनजातियों के

लिए संविधान के प्रारंभ से

295-क इस भाग के पूर्ववर्ती उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी लोकसभा में और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों के आरक्षण सम्बन्धी उपबन्घ, संविधान के आरंभ से दस वर्ष के कालावधि की समाप्ति पर प्रभावी न रहेंगे।

दस वर्ष के पश्चात् स्थानों

का आरक्षण न रहेगा।

यह भी सदन के फैसले के अनुसार है मैं कोई स्पष्टीकरण आवश्यक नहीं समझता।

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केवल चार संशोधन हैं जिनके बारे में मैं कुछ शब्द कहना चाहूँगा। अपने सर्वप्रथम मित्र श्री भार्गव का संशोधन लूंगा, और यह कहूँगा कि मैं उनके संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ क्योंकि मुझे पता चला है कि प्रतिवेदन में के साधारण कलेवर में जो इस सदन के लिए बनाया गया था उसमें नामिनेशन द्वारा एन्ग्लोइण्डियन

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 24 अगस्त, 1949, पृ. 674

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 24 अगस्त, 1949, पृ. 696-697