142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी, डॉ. अम्बेडकर ने जो कहा है उसके अनुसार, मैं अपना संशोधन वापिस लेना चाहूँगा।
[ संशोधन सभा समाप्त होते ही वापिस लिया गया। ]
* श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरे संशोधन का सिद्धांत वस्तुतः श्री टी. टी. कृष्णमाचारी
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के संशोधन द्वारा स्वीकार कर लिया है। इसलिए मैं अपना संशोधन वापिस लेता हूँ।
(संशोधन सभा समाप्त होते ही वापिस ले लिया गया।)
माननीय सभापति : अगला संशोधन संख्या 113 पंडित ठाकुर दास भार्गव द्वारा रखा गया है। इसे डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।
प्रश्न है-
“संशोधनों के संशोधन की प्रथम सूची (पाँचवाँ सप्ताह) के संशोधन संख्या 38 में प्रस्तावित अनुच्छेद 295(क) में शब्द “संविधान“ के पीछे कोष्ठक और अक्षर“(क)“ जोड़ा जाय और “राज्य“ शब्द के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाय-
(ख) “एंग्लो इण्यिन, जाति के लोकसभा अथवा राज्यों की विधानसभाओं में नामनिर्देशन द्वारा प्रतिनिधित्व के बारे में“
(संशोधन स्वीकार किया गया।)
माननीय सभापति : अगला संशोधन संख्या 114 प्रारूपण समिति का है।
प्रश्न है -
“(पांचवे सप्ताह) संशोधन के संशोधन की प्रथम सूची के संशोधन संख्या 38 में प्रस्तावित नये अनुच्छेद 295क में निम्नलिखित नियम जोड़ा जाए :
“परन्तु इस अनुच्छेद में कुछ भी लोकसभा में अथवा राज्य की विधानसभा में प्रतिनिधित्व को प्रभावित नहीं करेगा जब तक मौजूद सदन अथवा राज्य की विधान-सभा, जैसा भी मामला हो, भंग नहीं हो जाती।“
[ संशोधन अंगीकार किया गया, अनुच्छेद 295-क संशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया ]
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 25 अगस्त, 1949, पृ. 698