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“संशोधनों के संशोधनों की सूची पाँचवां सप्ताह के संशोधन संख्या 56 से 63 में तीसरी सूची के प्रारूप में शपथ अथवा सत्यनिष्ठा से शब्दों के स्थान पर-
सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ
ईश्वर की शपथ लेता हूँ
(स्थानापन्न के लिए प्रस्तावित) निम्नलिखित शब्द रखे जाएं :
“ईश्वर की शपथ लेता हूँ
सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हॅूँ
(संशोधन अंगीकार किया गया)
माननीय सभापति : मैं इसे लेता हूँ, जहाँ कहीं भी ऐसे समान असुविधाएं इसी क्रम में आती हैं, सदन डा. अम्बेडकर को उसी प्रकार दूसरे अनुच्छेद रखने की इजाजत देता है। माननीय सदस्य : हाँ
श्री जसपत राय कपूर : क्या मैं सुझाव दूँ कि सभी स्थानों पर जहाँ हमारे पास शब्द “प्रतिज्ञान या शपथ’’ शब्द हैं वहाँ हमे “शपथ“ पहले और “प्रतिज्ञान“ उसके पश्चात् रखने चाहिए यह ऐसा मूल वाक्य में होना चाहिए।
माननीय सभापति : ऐसा ही है। इसे उसी क्रम में रखा जाए जहाँ कहीं भी यह पद आए। माननीय सभापति : प्रश्न है -
कि “तीसरी अनुसूची में, घोषणा के प्रारूप 1 में संशोधनों के संशोधन की पहली सूची (पाँचवां सप्ताह) में संशोधन सख्या 56 के संदर्भ में, “सभी प्रकार के मनुष्य“ शब्दों के स्थान पर “सभी व्यक्ति“ शब्द रखे जाएं।
श्री नजीरुद्दीन : यह प्रारूपण समिति पर छोड़ दिया जाए।
माननीय सभापति : इस पर जोर नहीं दिया गया। इसलिए मैं यह मानता हूँ कि इसे हटा दिया गया है। माननीय सभापति : प्रश्न है -
कि “तीसरी अनुसूची में, घोषणा के प्रारूप VI में “अथवा राज्यपाल द्वारा अपने विवेकाधिकार से किए जाने वाले कार्यों से संबंधित किसी विषय के बारे में विशेष रूप में अनुज्ञात किया जाए“ शब्द हटा दिए जाएँ।
(संशोधन अंगीकार किया गया।)
माननीय सभापति : मैं दूसरे संशोधनों को मत के लिए प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं समझता क्योंकि मत वही होगा जो दूसरे अनुच्छेदों के लिए था।