तीसरी अनुसूची - Page 171

150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमद : उन्हें नियमानुसार रखा जाय और सदन द्वारा अस्वीकार किया जाए।

* माननीय सभापति : तब मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश की गई प्रतिज्ञा रखता हॅू, जो श्री कामथ और डॉ. अम्बेडकर के संशोधन से संशोधित हुई है। जो सभी प्रारूपों के बारे में है मैं उन्हें पृथक से पढ़ना आवश्यक नहीं समझता।

(प्रस्ताव स्वीकार किया गया।) माननीय सभापति : प्रश्न है :

कि“ तीसरी अनुसूची संशोधित रूप में, संविधान का अंग है )

(प्रस्ताव स्वीकार किया गया।)

[ तीसरी अनुसूची संशोधित रूप में, संविधान में जोड़ी गई। ]

** माननीय सभापति : मैं नहीं समझता कि यह मानने के लिए सदस्यों के पास कोई औचित्य है कि दूसरे सदस्य संशोधनों का अघ्ययन नहीं करते।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मुझे कुछ गंभीर सदस्यों ने विश्वास दिलाया है कि उन्होंनें संशोधनों को नहीं पढ़ा है। इसलिए गंभीर स्वभाव के संशोधनों के संबंध में, मेरा कहना है कि सदन को उन पर विचार करने के लिए समय रखना चाहिए।

माननीय सभापति : यदि किसी विशेष संशोधन के बारे में यदि कोई प्रश्न उठता है, और यदि सदस्य समय चाहते हैं हम उस पर उसी समय विचार करेंगे। आइए अब हम अनुच्छेद-दर-अनुच्छेद पर चलते रहें -

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संशोधन परसों शनिवार को परिचालित किए गये थे।

माननीय सभापति : क्या वे शनिवार को परिचालित किए गये थे? कुछ आदरणीय सदस्य : जी हाँ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं समझता हूँ शनिवार शाम को, जहाँ तक नजीरुद्दीन अहमद का सम्बन्ध है, लगभग चालीस संशोधन इनके नाम पर शेष हैं। श्री नजीरुद्दीन अहमद : केवल बीस।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह सम्पूर्ण प्रथम सूची को पूरा करते है। इसलिए मेरा निवेदन है कि शिकायतों को, जो केवल इन्हीं से संबंधित हैं, इनके पास समय नहीं था, इसलिए इन्हें निराधार माना जाए।

* * * *

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 26 अगस्त, 1949, पृ. 717

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 721