152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रविष्टि-2
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मैं प्रस्तावित करता हूँ -
कि “प्रथम सूची के प्रविष्टि 2 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए -
“2 केन्द्रीय आसूचना और अन्वेषण व्यूरो“
जोड़े गए केवल शब्द और ‘‘अन्वेषण’’ हैं। अन्यथा प्रविष्टि वही है जो मसौदे में मौजूद थी।
श्री महावीर त्यागी : इसके जोड़ने का महत्व क्या है?
क्या आप प्रकाश डालेंगे कि आपने ये शब्द क्यों जोड़े?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : विचार यह है कि संघ कार्यालय पर एक ब्यूरो जैसा होना चाहिए जो सम्पूर्ण भारत क्षेत्र में लोगों द्वारा किये जा रहे हर प्रकार के अपराध के लिए सभी सूचना इकट्ठी करेगा और अन्वेषण भी करेगा कि जो सूचना उनको दी गई है वह सही है अथवा नहीं और उसके द्वारा प्रान्तीय सरकार को सूचना देगा कि भारत के अलग-अलग भागों में क्या हो रहा है ताकि वे अपने पुलिस बल का उससे कहीं बेहतर ढंग से प्रयोग करने की स्थिति में आ जाएं। जितनी वे इस सूचना के अभाव में नहीं कर सकते थे।
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन मैं अपने मित्र नजीरुद्दीन अहमद द्वारा लाये गये किसी संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूँ ये संशोधन गड़बड़ मस्तिष्क के परिणाम प्रतीत होते हैं।
माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर को कठोर भाषा प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : संशोधन 146 का उद्देश्य और अन्वेषण“ शब्दों को हटाना है। ‘‘अन्वेषण’’ शब्द हटाने का आधार जैसा मेरे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद ने सुझाया है।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 724
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 724
वही पृष्ठ 726