प्रविष्टि 3 - Page 175

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरे मित्र श्री कामथ द्वारा मुझसे पूछे गये प्रश्न के उत्तर में उन्हें मैं बताना चाहूँगा कि नागरिकों के निष्कासन के लिए कोई उपबन्ध नहीं हो सकता। यहॉ ’निरोध’ हो सकता है और ’निष्कासन’ नहीं। निष्कासन कानून केवल अन्य देशीय पर लागू हो सकता है और हमारी सूची में एक प्रविष्टि अन्य देशीय से निपट सकेगी, यदि यह उसे निष्कासित करना चाहता है।

श्री एच. वी. कामथ : सूची में प्रविष्टि कहाँ है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : प्रविष्टि संख्या 191 अब मेरे मित्र डॉ. देशमुख द्वारा मुझसे पूछे गये प्रश्न के बारे जिसमें वे चाहते हैं कि ‘‘राज्य से सम्बन्धित प्रश्न’’ शब्द बदल दिए जाने चाहिएं। मेरे विचार में, वह सीमित प्रविष्टि रही होगी, और हमारी बहुत अच्छी है क्योंकि यह उस विषय-वस्तु को विनिर्दिष्ट करती है, जिसके संबंध में निवारक निरोध का आदेश दिया जा सकता है।

और अब श्री बृजेश्वर प्रसाद लोक सुरक्षा सार्वजनिक सुरक्षा को समाविष्ट करना चाहते हैं।

श्री बृजेश्वर प्रसाद : मैं इसे नहीं चाहता था। मैं केवल यह जानना चाहता था कि क्या ‘‘रक्षा इत्यादि से सम्बन्धित “कारण पद“ में “सार्वजनिक सुरक्षा अथवा हित“ सम्मिलित है।“

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, “भारत की सुरक्षा“ बहुत व्यापक पद है।

श्री बृजेश्वर प्रसाद : मैं “भारत की सुरक्षा का हवाला नहीं दे रहा हूँ बल्कि “सार्वजनिक सुरक्षा अथवा हित“ की बात कर रहा हूँ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अब श्री नजीरुद्दीन अहमद के प्रश्न के बारे में, वे चाहते हैं कि ‘‘ऐसे निरोध के अधीन व्यक्ति’’ शब्द को हटा दिया जाए।

माननीय सभापति : नहीं, उन्होंने वह संशोधन पेश नहीं किया। वे केवल “विदेशी’’ शब्द के स्थान पर “बाहरी’’ शब्द बदलना चाहते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हम यहाँ “विदेशी’’ शब्द हर स्थान पर प्रयोग कर रहे हैं और मैं सोचता हूॅ यह अच्छा होगा कि हम इसी शब्द का प्रयोग करते रहें।

श्री एच. वी. कामथ : क्या भारत की सुरक्षा वही है जैसी इसके किसी भाग की सुरक्षा?

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 729-30