160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किन्हीं दूसरे अनुच्छेदों के अधीन कार्य कर सकता है और किसी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन का सदस्य हो सकता है। यदि सदन इसके बारे में विशिष्ट है, तो मैं समझता हूँ कि कोई हानि नहीं हो सकती यदि श्री कामथ का संशोधन स्वीकार कर लिया जाए और इसलिए तय करने के लिए मैं मामला सदन पर छोड़ता हूँ।
(प्रविष्टि 12 सूची में जोड़ी गई।)
| 9d | Col2 |
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नई प्रविष्टि 9क
* माननीय सभापति : श्री सिब्बनलाल सक्सैना द्वारा एक और प्रविष्टि जोड़ने से संबंधित एक संषोधन की सूचना है।
’भूमंडलीय ऊर्जा और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान और इसके उत्पादन, विकास और प्रयोग के लिए आवश्यक दूसरे संसाधन........’
श्री सिब्बनलाल सक्सैना, क्या आप इसे प्रस्तावित करना चाहेंगे? माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसका अर्थ मैं नहीं जानता।
माननीय सभापति : हमारे पास अणु शक्ति है, वे भूमंडलीय ऊर्जा भी चाहते हैं।
प्रो. शिब्बनलाल सक्सैना : मैं आशा करता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर देखें कि यह कमी दूर कर दी जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, जो कुछ मैं कह सकता हूँ यह है कि यदि मेरे मित्र श्री शिब्बनलाल सक्सेना द्वारा पेश किया गया संशोधन आवश्यक है, तो उस पर विचार करने के लिए हमारे पास सूची 1 की प्रविष्टि 91 के अधीन काफी शक्ति हैः
‘‘किसी भी प्रकार का ‘कर’ सहित कोई अन्य विषय सूची II या सूची III में या इनमें से किसी भी सूची में सम्मिलित नहीं है।’’
श्री एच. वी. कामथ : सूची में अनेक प्रविष्टियां आ जाएंगी।
(प्रस्ताव अस्वीकार किया गया।)
** माननीय सभापति : प्रविष्टि 14 डॉ. अम्बेडकर, क्या इसके उत्तर में आप कुछ कहना चाहेंगे?
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 744
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 745