प्रविष्टि 22 - Page 182

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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कोई व्याख्या आवश्यक नहीं है।

(प्रविष्टि 14 संघ सूची में जोड़ी गई।)

प्रविष्टि 22

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं प्रस्तावित करता हूँ :

“कि सूची I की प्रविष्टि 22 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाएः

’22 समुद्री डकैतियाँ और बड़े समुद्र में अथवा आकाश में होने वाले अपराध, राष्ट्रों के कानूनों के विरुद्ध भूमि अथवा गहरे समुद्र अथवा आकाश में होने वाले अपराध’“

इस प्रविष्टि का दूसरा भाग ’राष्ट्रों के कानूनों के विरुद्ध भूमि अथवा गहरे समुद्र अथवा आकाश में अपराध’ नया है। पहले के मसौदे में इसे छोड़ दिया गया था। पहले भाग के विषय में हम ’अपराध’ शब्द को ’महाअपराध और अपराधों’ के लिए स्थानापन्न करते हैं जैसे यह शब्द भारत में आमतौर पर प्रयुक्त होता है। ’महा अपराध और अपराध’ अंगरेजी के तकनीकी शब्द हैं। पहले भाग में से भी हम ’राष्ट्रों के कानूनों के विरुद्ध’ शब्दों को ले रहे हैं क्यांकि महा अपराध और अपराध ऐसे विषय हैं जिन्हें किसी देश द्वारा उसके अपने कानूनी क्षेत्र और अधिकार के कारण ठीक किए जा सकते हैं। इसे राष्ट्रों के कानून से कुछ करना नहीं है।

** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरे मित्र नजीरुद्दीन अहमद ने जो कहा उसे सुनकर मैं भयभीत हूँ, मैं दुबारा कहता हूँ कि जो कुछ करने के लिए प्रविष्टि 22 प्रस्ताव करती है उसके बारे में उनकी धारणा बहुत स्पष्ट नहीं है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : कठिनाई यह है कि डॉ. अम्बेडकर बातचीत में लगे थे और मुझे नहीं सुना।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : निःसंदेह, मैं बातचीत में व्यस्त था, लेकिन जो कुछ आपने कहा उसके प्रति पूर्णतः अवधान था।

मेरे मित्र ने पहले यह प्रश्न उठाया कि हमें ’जलदस्युता और अपराध’ पद का बहुवचन में प्रयोग क्यां करें। ठीक, दूसरा रास्ता जिसमें हम जलदस्युता और अपराध का प्रयोग करेगें वह सामूहिक शब्दों में होगा। मैं सोचता हूँ इस प्रकार के विषयों में, जिसके लिए अपराधिक कानून दिए गए हैं यह बहुत अच्छा होगा कि सामूहिक शब्दों का प्रयोग न

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 747-48

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 29 अगस्त, 1949, पृ. 750-51