164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि मैं ऐसा कहूँ कि यह विषय पहले ही अनुच्छेद 271-क में लिया जा चुका है। मेरी कठिनाई हैः मेरे मित्र श्री शिब्बनलाल सक्सेना का संशोधन स्वामित्व की बात करता है। अब, इन सभी विधायी सूचियों में हम केवल कानून बनाने की शक्ति की बात करते हैं, विनियोजित करने की शक्ति की नहीं। यह विषय दूसरे कानून से विनियमित है और न कि विधायी प्रविष्टियों द्वारा। इसलिए मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता।
माननीय सभापति : इन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला दिया है, लेकिन मैं सोचता हूँ यह हमारे संविधान के अनुच्छेद 271क जैसी किसी चीज की अनुपस्थिति पर आधारित है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हमने खुलासा किया था कि यहाँ कोई प्रविष्टियां नहीं थी और इसीलिए यह शंका का विषय था और उस शंका को दूर करने के लिए हमने अनुच्छेद 271-क रखा है। व्यावहारिक तौर पर यह श्री शिब्बनलाल सक्सेना के संशोधन की शब्दशः पुनरावृत्ति है।
प्रविष्टि 31
** माननीय सभापति : मैं देखता हूँ कि यहाँ प्रविष्टि 31 के भी कुछ संशोधन हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं प्रस्तावित करता हूँ :
“कि प्रथम सूची की प्रविष्टि 31 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’31. संसद के द्वारा बनाए गए कानून के अधीन राजमार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित।’
विषय को स्पष्ट करने के लिए यह रूपांतरण मात्र है।’
*[ प्रविष्टि 31 संशोधित रूप में सूची में जोड़ी गई। ]
प्रविष्टि 37
“सूची I का संशोधन 12, प्रविष्टि 37 में ’वायुमार्ग अथवा समुद्र द्वारा’ शब्दों के
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 753-754
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 754
*** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 755