166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तक अधिकतम और न्यूनतम दरें और भाड़ा, स्टेशन तथा सेवा टर्मिनल प्रभार इत्यादि का संबंध है वे केंद्रीय विधानमंडल के क्षेत्राधिकार से निकाल दिए गए। यह महसूस किया जा रहा है कि यह वांछनीय है कि चूंकि संपूर्ण भारत राज्यक्षेत्र में रेल सेवा में एकरूपता हो। यहाँ एक ही विधायी अधिकार रेलवे के सभी विषयों पर एकरूपता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। परिणामस्वरूप, पहले भाग में प्रविष्टि को छोटी रेल सहित सभी रेल तक बढ़ा दिया गया है। दुबारा, चूंकि कानूनों का उद्देश्य एकरूप होना है इसलिए यह महसूस किया जा रहा है कि प्रविष्टि के दूसरे भाग को बनाये रखना आवश्यक है जो संघीय रेल और छोटी रेल में अंतर करता है।
मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि यह प्रविष्टि पूर्णतः विधायी प्रविष्टि है। यह वह प्रविष्टि नहीं है जो स्वामित्व के बारे में है। इसका अर्थ है कि केन्द्र को भले ही कम और अधिक भाड़ा और दरें तथा टर्मिनल प्रभार ठीक करने का अधिकार है, प्रत्येक राज्य जो छोटी रेल का मालिक है चाहे वह राज्य भाग में है अथवा भाग III में, यदि वह किसी विशेष रेल का मालिक है तो भाड़े और दरों की प्राप्तियाँ रखने का अधिकारी होगा जो केन्द्र द्वारा निश्चित किए जाएंगे। यह उसके स्वामित्व के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा। वे उसी प्रकार रहेंगे जैसे हैं। यदि केन्द्र किसी राज्य चाहे वह भाग I में है अथवा भाग III में, की छोटी रेल को अब लेना चाहता है तो संघ उसे साधारण तरीके से प्राप्त कर सकेगा। अतः यह पूर्णतः विधायी प्रविष्टि है। संशोधन का उद्देश्य रेल से संबंधित सभी विषयों के लिए समान कानून रखना है और यह स्वामित्व के प्रश्न को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं करती।
यद्यपि ट्रेमवेज का प्रश्न रेल के प्रश्न से अलग कर दिया गया है। निर्वचन खण्ड में हमने रेल की परिभाषा करने का इस प्रकार प्रस्ताव किया है कि ट्रेमवेज को अलग कर दिया है जिससे भाग I और भाग III के राज्य ट्रामपथ (ट्रेमवेज) को सभी प्रकार से ठीक करने का अधिकार रख सकेंगे यद्यपि वे रेल के अंतर्गत नहीं आते।
श्री आर. के. सिधवा : यहाँ एक लघु रेल (माइनर रेलवे) अधिनियम है जो प्रांतीय सरकारों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। क्या मैं जान सकता हूँ कि उसे समाप्त करके संघ में लाने का आशय क्या है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, संघ के पास उस कानून का निराकरण
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करने का, नया कानून बनाने का अथवा यदि वह चाहे इसे बनाये रखने का अधिकार है। यह केवल अधिकार देने वाली प्रविष्टि है जो केन्द्र को तो बड़ी अथवा छोटी रेल चलाने के लिए अलग कानून बनाने अथवा सभी रेलवेज को ठीक करने के लिए एक ही कानून बनाने का अधिकार देती है, चाहे रेल बड़ी है अथवा छोटी।
श्री आर.के. सिधवा : तब छोटी रेलें माइनर रेलवेज एक्ट से शासित होंगी।