167
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ, जब तक संसद उसे बदलती नहीं तब तक वर्तमान कानून चलते रहेंगे। यह केवल संसद को परिवर्तन करने का अधिकार देने के लिए है।
माननीय सभपति : अब मैं प्रविष्टि 38 को मतदान के लिए रखता हूँ। मुझे कहा गया है कि यहाँ एक संशोधन है जिसे मैंने प्रातः नौ बजे के पश्चात् प्राप्त किया है। मुझे खेद है कि मैं उसे स्वीकार नहीं कर सकता।
(डॉ. अम्बेडकर के संशोधन से संशोधित हुई प्रविश्टि 38 संघ-सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 39
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं प्रस्तावित करता हूँ :
“कि पहली सूची को प्रविष्टि 39 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’39. इस संविधान के प्रारंभ पर राष्ट्रीय पुस्तकालय, भारतीय संग्रहालय, इम्पीरियल संग्रहालय, विक्टोरिया स्मारक और भारतीय युद्ध स्मारक और कोई अन्य भारत सरकार जो पूर्णतः अथवा भागतः वित्त पोषित है और संसद द्वारा विधि द्वारा राष्ट्रीय महत्व की घोषित वैसी ही कोई अन्य संस्था। प्रविष्टि का सार वही है जो वर्तमान में है सिवाय कुछ जवानी बदलाव के जो तदनुसार 15 अगस्त, 1947 को उनके नाम में आये हैं।
श्री बी. दास (उड़ीसा : सामान्य) : मैं जानना चाहता हूँ कि संविधान कब प्रभाव में आएगा और अनुकूलन किए जाएंगे ’इम्पीरियल’ शब्द ठीक किए जाएंगे, समाप्त होंगे। मैं उम्मीद करता हूँ ’हिज मैजेस्टी सरकार’, ’दी क्राउन’ इत्यादि शब्द समाप्त होंगे।
मननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अनुकूलन कानूनों पर लागू होगा, नामों पर नहीं।
माननीय सभापति : यह प्रविष्टि केन्द्रीय विधानमंडल को नाम बदलने का अधिकार देती है।
इस संबंध में श्री नजीरुद्दीन अहमद का संशोधन संख्या 160 है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कि अधिक स्पष्टीकरण आवश्यक है कि श्री नजीरुद्दीन अहमद का संशोधन मैं स्वीकार क्यों नहीं कर सकता? जैसा आप देखेंगे कि प्रविष्टि के दो भाग हैं। पहले भाग में यह उन संस्थाओं के बारे में