168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है जो यहाँ गिनाए गए हैं। दूसरे भाग में यह उन संस्थाओं के बारे में है जो पूर्णतः अथवा अंशतः भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं। इसलिए ’वैसे ही’ शब्द का प्रयोग संभव नहीं है क्योंकि इससे प्रविष्टि का उद्देश्य सीमित हो जाएगा जो केंद्रीय सरकार को किसी संस्था को अपने अधिकार में ले लेने का अधिकार देती है जो या तो वित्त पोषित है अथवा अंशतः स्व-वित्त पोषित और भागतः राज्य द्वारा वित्त पोषित है।
श्री नजीरुद्दीन अहमद द्वारा रखे गए तीन संशोधनों में से दो पारित नहीं हुए और तीसरा डॉ. अम्बेडकर के संशोधन द्वारा खारिज कर दिया गया। प्रविष्टि 39 संघ सूची में जोड़ी गई।
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प्रविष्टि 40
“कि सूची I की प्रविष्टि 40 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’40. इस संविधान के प्रारम्भ होने पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, और दिल्ली विश्वविद्यालय नामों से ज्ञात संस्थाएं और जो संसद द्वारा कानून द्वारा राष्ट्रीय महत्व की घोषित कोई अन्य संस्था।’
मेरा निवेदन है कि ’विश्व विद्यालय’ शब्द एक गलती है और यह ’संस्था’ होना चाहिए और मुझे उम्मीद है कि आप इसे स्थानापन्न करने की आज्ञा देंगे।
इसमें कोई मौलिक बदलाव नहीं है सिवाय इसके कि इसका बाद का भाग संसद को किसी संस्था को जिसे यह राष्ट्रीय महत्व की समझती है, लेने की आज्ञा देता है।
डॉ. पी. एस. देशमुख : क्या मैं सुझाव दूँ कि 40-क को भी साथ में ले लिया जाए? यह उसी चीज का अनिवार्य अंग है।
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“सूची। की प्रविष्टि 40 के पश्चात् निम्नलिखित नई प्रविष्टि अन्तःस्थापित की जाएः
’40क. भारत सरकार द्वारा पूर्णतः अथवा भागतः वित्त पोषित और संसद के द्वारा कानून द्वारा राष्ट्रीय महत्व की घोषित संस्थाएं विज्ञान अथवा तकनीकी शिक्षा की संस्थाएं।’
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 761