प्रविष्टि 41 - Page 191

170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(प्रविष्टि 40 जैसी डॉ. अम्बेडकर के संशोधन द्वारा संशोधित हुई संघ सूची में जोड़ी गई।)

प्रविष्टि-41

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है-

“कि सूची I की प्रविष्टि 41 में ’और प्राणी विज्ञान संबंधी’ शब्दों के स्थान पर ’प्राणी विज्ञान संबंधी और नृविज्ञान संबंध’ शब्द रखे जाएं।“

** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ’नृविज्ञान’ शब्द बहुत विस्तृत है और आचार विज्ञान शब्द इसके अंतर्गत आएगा।

*** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मुझे खेद है कि मेरे मित्र सिधवा ने केंद्रीय सरकार द्वारा अतीत में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के प्रति बरती गई उपेक्षा और उदासीनता के रवैया को बहुत अधिक बताया है। मैं स्वीकार करता हूँ कि अब तक यह विषय केंद्र द्वारा उपेक्षित रहा है, लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि प्रांत भू-विज्ञान में उससे अधिक रुचि ले रहे हैं जितनी केंद्र द्वारा अब तक ली गई है।

सर्वप्रथम यह विषय बहुत बड़े आकार का है जिसमें बहुत व्यय होगा और मैं नहीं समझता कि राज्य खनिजों को जो उनके क्षेत्र में पाए जाते हैं, विकसित करने में समर्थ होंगे। इस विचार से, मैं समझता हूँ कि भूगर्भ को समवर्ती सूची में अंतरित करने में काई लाभ नहीं होगा जिससे प्रदेशों को इसके बारे में कानून बनाने का एक अवसर दिया जाए।

उनके संशोधन को स्वीकार करने में मुझे दूसरी कठिनाई यह प्रतीत होती है कि संघ सूची में एक प्रविष्टि है जिसमें लिखा है कि भारत के खनिज साधन केंद्र द्वारा विकसित किए जा सकते हैं। यदि संसद को एक कानून बनाना हो कि देश के खनिजों का विकास केंद्रीय विषय होगा तो स्पष्टतः यहाँ बड़ी कठिनाई संसद के मार्ग में कानून को लागू करने अथवा खनिज साधनों को विकसित करने में हो जाएगी, यदि राज्यों के पास कानून बनाने की समवर्ती शक्ति रहती है। इसलिए श्री सिधवा से मेरा अनुरोध है कि प्रविष्टि जैसी है वैसी ही रहने दी जाए।

माननीय सभापति : तब मैं संशोधन को मतदान के लिए रखता हूँ। पहला संशोधन श्री कामथ ने रखा है.....

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 769

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 769

*** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 770