प्रविष्टि 43 - Page 192

171

श्री एच.वी. कामथ : जैसा डॉ. अम्बेडकर मुझे विश्वास दिलाते हैं कि ’मानव शास्त्र संबंधी’ शब्द में ’निरवेश विधा’ शब्द सम्मिलित है मैं उनकी श्रेष्ठ प्रज्ञा को स्वीकार करता हूँ और संशोधन पर दबाव नहीं डालता।

(संशोधन, सभा की इजाजत से वापिस लिया गया।)

श्री आर. के. सिधवा : दिए गए आश्वासन की दृष्टि से मैं संशोधन वापिस लेने की इजाजत देने की प्रार्थना करता हूँ।

(सभा की इजाजत से संशोधन वापिस लिया गया।)

(डॉ. अम्बेडकर का संशोधन अंगीकार किया गया।)

(प्रविष्टि 41 संशोधित रूप में संघ सूची में जोड़ी गई।)

प्रविष्टि 43

* माननीय सभापति : अब हम प्रविष्टि 43 लेते हैं। डॉ. अम्बेडकर संशोधन पेश करेंगे। आदरणीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है -

“कि सूची I की प्रविष्टि 43 के स्थान पर निम्नलिखित रखी जाए :

’43. संघ के प्रयोजनों के लिए संपत्ति अर्जन या अधिग्रहण’।

सदस्य देखेंगे कि मूल प्रविष्टि में, जैसी यह है, दूसरे शब्द भी साथ में थे। जैसे प्रतिकर के सिद्धांत इत्यादि। उन शब्दों को समवर्ती सूची में एक पृथक प्रविष्टि रखने का प्रस्ताव है। इसलिए उन शब्दों को यहाँ रखना अनावश्यक है। समवर्ती सूची में यह प्रविष्टि 35 होगी। श्री श्यामानन्दन सहाय (बिहार : सामान्य) : श्रीमन, मैं एक सुझाव देना चाहता

हूँ।

माननीय सभापति : थोड़ा इंतजार कीजिए। यहाँ एक प्रस्ताव रखा जाना है।

श्री श्यामानन्दन सहाय : प्रस्ताव पेश होने से पूर्व मैं इसे करना चाहता हूँ। सूची में यह मद जिसे डॉ. अम्बेडकर ने प्रस्तावित किया है अनुच्छेद 24 की भाषा के विषय में होगी। अतः मेरा सुझाव है कि इस मद को तब तक रोक दिया जाए जब तक हम अनुच्छेद 24 पारित करते हैं।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 30 अगस्त, 1949, पृ. 771-72