प्रविष्टि 52 - Page 198

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मैं इस प्रश्न पर आ रहा हूँ कि हम इस प्रविष्टि को क्यों लाये हैं - उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों में वकालत करने के हकदार व्यक्तियों मेरे मित्र श्री अल्लादी कृष्णा स्वामी अययर द्वारा यह स्थिति पहले ही व्यक्त की जा चुकी है, लेकिन इसी विषय को मैं शीघ्र ही रखूंगा और वह यह है कि वस्तुतः इन शब्दों में शामिल करने के लिए कोई बहुत असाधारण नहीं है- उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों में वकालत करने के हकदार व्यक्ति, जैसा कि सदस्य देखेंगे अनुच्छेद 121 जो संसद को उन लोगों के बारे में कोई कानून बनाने की शक्ति देता है जो उच्चतम न्यायालय में वकालत कर रहे हैं। इसलिए वह शक्ति वहाँ पहले से ही है और यहाँ नया कुछ भी नहीं है जहाँ तक प्रविष्टि उन लोगों के बारे में उल्लेख करती है जो उच्चतम न्यायालय में वकालत करने के लिए हकदार हैं।

अब उच्च न्यायालय के बारे में स्थिति यह है जो शक्ति आज केंद्र के पास है वह समवर्ती सूची की प्रविष्ट 17 में है, जो वृत्तियों के बारे में है और कानूनी विधिक व्यवसाय व्यवसायों में से एक है। इसलिए संसद के लिए पूर्णतः संभव है कि वह समवर्ती सूची की प्रविष्टि 17 में दी गई शक्ति के फलस्वरूप उच्च न्यायालय में हाजिर होने वाले व्यक्तियों की वकालत करना विनियमित करने के लिए कानून बनाये, लेकिन उसके साथ कठिनाई यह है। समवर्ती सूची का अर्थ है कि दोनों पक्ष कानून बना सकते हैं। केंद्र कानून बना सकता है और प्रांत भी कानून बना सकते हैं और कानून एक दूसरे से बिल्कुल अनुरूप नहीं होने चाहिएं। परिणामस्परूप, यह महसूस किया गया कि प्रविष्टि 17 समवर्ती सूची में होने के कारण जिसमें सभी वृत्तियों को छोड़कर शामिल हैं। विधिक वृत्ति का एक भाग निकालकर और उसको यहाँ रखना जिससे कि कानूनी वृत्ति के बारे में कोई कानून बनाये जा सके जहाँ तक इसका संबंध उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले व्यक्तियों के विधि व्यवसाय का संबंध है जो केंद्र द्वारा विधायन के लिए एक अनन्य विषय है, और इसका कारण था कि हमने ऐसा मेरे मित्र श्री अल्लादी कृष्णास्वामी अययर द्वारा निर्दिष्ट कठिन मामलों के लिए किया था और मैं उनमें से एक को दुहराना चाहता हूँ। कदाचित जो कुछ इन्होंने कहा वह आपने नहीं सुना। उदाहरण के लिए, मान लीजिए, एक मद्रास का वकील अथवा बैरिस्टर एक मामले में उच्चतम न्यायालय में हाजिर होता है और उच्चतम न्यायालय में हाजिर होता है और उच्चतम न्यायालय मामले का फैसला करने के बजाय मामला बम्बई उच्च न्यायालय को भेज देता है। फिर क्या होता है बम्बई सरकार अथवा बम्बई कानून, यदि प्रविष्टि 17 के अधीन बनाया गया है, मद्रास के व्यक्ति को बम्बई उच्च न्यायालय में हाजिर होने की इजाजत नहीं देगा। परिणामस्वरूप, मद्रास का वकील जो उच्चतम न्यायालय में हाजिर हुआ है उसने पूरा मामला किया लेकिन यदि मामला बम्बई उच्च न्यायालय में आ गया है तो वह उच्च न्यायालय