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- निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए संघ अभिकरण संघ संस्थाएं अर्थात् अनुसंधान के लिए वष्त्त, व्यवसाय अथवा तकनीकी प्रशिक्षण के लिए अपराध के अन्वेषण या
खोज में वैज्ञानिक तकनीकी सहायता के लिए पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए अथवा विशेष अध्ययनों की उन्नति के लिए।“
’व्यावसायिक प्रशिक्षण’ और ’अपराध के अन्वेषण या खोज’ पुलिस अधिकारियों के लिए इत्यादि शब्दों के समावेश से यह प्रविष्टि किसी हद तक विस्तृत हो गई है।
* माननीय सभापति : श्री करीमुद्दीन के नाम पर यहाँ एक संशोधन (संख्या 3544) प्रविष्टि 57 के लिए है। जैसा कि इसे पेश नहीं किया गया है। डॉ. अम्बेडकर को उत्तर देना चाहिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति महोदय, मैंने अपने द्वारा प्रस्तावित
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प्रविष्टि से मेरे आदरणीय मित्र श्री कामथ द्वारा पेश किए गए संशोधन की तुलना की है, मैं समझता हूँ कि एक विषय को छोड़कर केंद्रीय सरकार उस उद्देश्य की पूर्ति कर सकेगी जो मेरे आदरणीय मित्र श्री कामथ के मस्तिष्क में है। मात्र वस्तु/विषय जिसे केंद्रीय सरकार प्रविष्टि 57 के अधीन प्रभावित नहीं करेगी वह अध्यात्मिक खोज है। मैं नहीं समझता कि सदन, उन सभी कठिनाइयों को जानते हुए जिन्हें लेकर केंद्रीय सरकार इस समय चल रही है किसी ऐसा अभिकरण के भार से और लादना चाहेगा। संशोधन के शेष उद्देश्य प्रविष्टि 57 के अंतर्गत आ जाएंगे।
श्री एच.वी. कामथ : आप कैसे कहते हैं कि प्रस्तावित प्रविष्टि के अंतर्गत प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आ जाते हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं ऐसा समझता हूँ क्योंकि प्रशिक्षण केवल
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पुलिस अधिकारियों के लिए नहीं है। प्रयोग की गई भाषा है ’वष्त्तिक, व्यावसायिक अथवा तकनीकी प्रशिक्षण’। उपर्युक्त के अधीन कुछ भी लाया जा सकता है।
माननीय सभापति : संशोधन की शक्ल में डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश की गई प्रविष्टि को रखता हूँ। प्रश्न है :
“कि सूची। की प्रविष्टि 57 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’57. निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए संघ अभिकरण और संघ संस्थान अर्थात
खोज के लिए वृत्तिक, व्यावसायिक अथवा तकनीकी प्रशिक्षण के लिए, अपराध के अन्वेषण या खोज में वैज्ञानिक या तकनीकी सहायता अथवा पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए अथवा विशेष अध्ययन की उन्नति के लिए।’
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 788