प्रविष्टि 57 क (जारी) - Page 203

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(संशोधन स्वीकार किया गया।)

(प्रविष्टि 57 संशोधित रूप में संघ सूची में सम्मिलित की गई।)

प्रविष्टि 57 का (जारी)

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है

“कि सूची 1 की प्रविष्टि 57 के पश्चात् निम्नलिखित नई प्रविष्टि अंतःस्थापित की जाएः

57क. उच्च शिक्षा की संस्थाओं में, वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थाओं और अन्वेषण संस्थाओं में सहायोग और स्तर को बनाये रखना’ ताकि उनका स्तर नीचे न जाए।

यह प्रविष्टि पहली प्रविष्टि संख्या 57 की पूरक मात्र है। राज्यों द्वारा अनुरक्षित संस्थाओं विषयक प्रविष्टि 57क सीमित हद तक केंद्र को किसी हद तक अन्वेषण संस्थाओं और उन संस्थाओं को बचाने के लिए जिनका स्तर कम हो रहा है, शक्तियाँ देने का प्रस्ताव करती है।“

श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है

“कि सूची 1 (छठा सप्ताह) के संशोधन संख्या 28 में प्रस्तावित नई प्रविष्टि 57क में शब्द ’अनुरक्षित’ के स्थान पर ’अवधारण’ शब्द रखा जाए।

29 है।

माननीय उपसभापति : मैंने सोचा था वे नये अनुच्छेद थे। डॉ. अम्बेडकर, क्या उसको आप बोलने से पहले पेश करना पसंद करेंगे? माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ।

माननीय उपसभापति : श्री दास आप संख्या 29 प्रस्तुत कर सकते हैं।

*** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति महोदय, श्रीमन, मैं सोचता हूँ कि मेरे मित्र द्वारा किसी मात्रा में यहाँ मिलावट की गई है जो इस प्रविष्टि 57क पर बोले हैं। जहाँ तक मैं समझ पाया हूँ उनका विवाद यह है कि यह प्रविष्टि 57क केवल उस समय ही जाने दी जाए जब केंद्र द्वारा राज्य को कुछ अनुदान दिया जाता

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 788

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 793

*** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 796