प्रविष्टि 58 - Page 205

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अथवा राज्य उद्देश्य के लिए मान्यता की आज्ञा देंगे।

परिणामस्वरूप वित्तीय सहायता के प्रश्न से परे, यह नितांत आवश्यक है दोनों केंद्र के हित में अथवा राज्यों के हित में कि अखिल भारतीय स्तर पर स्तर बनाये रखा जाए। इस प्रवेश का यही उद्देश्य है और मेरे फैसले के अनुसार यह बहुत महत्वपूर्ण और श्रेयस्कर उपबंध है, तथ्यों के विचार से कि यहाँ बहुत से प्रांत हैं जो अन्वेषण संस्थाएं अथवा विश्वविद्यालय स्थापित करने की जल्दी में हैं अथवा आखिर संसार को दिखाने के लिए थोड़ा स्तर गिराना चाहते हैं कि वे जितना वह पहले कर रहे थे कुछ बेहतर परिणाम दे रहे हैं।

डॉ. पी. एस. देशमुख : क्या प्रतिशत या उत्तीर्ण होने के लिए अंक निश्चित करना सरकार का इरादा है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वे ऐसा कर सकते हैं किन्हीं साधनों से स्तर बनाए रखना सरकार का काम है जिन्हें वह उचित समझें। मैं नहीं कह सकता कि सरकार को क्या करना चाहिए।

(श्री बी.के. दास द्वारा पेश किए गए संशोधन वापिस लिए गए। डॉ. अम्बेडकर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। प्रविष्टि 57क संघ सूची में जोड़ी गई।)

Col1 Col2

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :

“कि सूची I की प्रविष्टि 58 के स्थान पर निम्नलिखित रखी जाएः

’58. लोक सेवा आयोग, अखिल भारतीय सेवा : संघ लोक सेवा आयोग।’

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अखिल भारतीय सेवा को हटाने की आवश्यकता के बारे में मेरे मित्र डॉ. पंजाब राव देशमुख के संशोधन के बारे में, उसे स्वीकार करना मात्र इस कारण संभव नहीं है कि अखिल भारतीय सेवाएं और उनके नियम भारत शासन अधिनियम में नहीं थे क्योंकि वह यह विषय था जो केवल गृह मंत्री के हाथों में था। चूंकि गृह मंत्री अब अदृश्य हो रहे हैं इसलिए अखिल भारतीय सेवाओं के लिए विनियम का कहीं संविधान में किसी संस्था द्वारा उपबंध करना, आवश्यक और सबसे अधिक समुचित अभिकरण केंद्र है। सूची 1 उन विषयों के बारे में है जो केंद्र के कार्य-क्षेत्र में आते हैं। इसलिए अखिल भारतीय सेवाओं के लिए स्वाभाविक स्थान सूची 1 है। यह एक तर्क है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 797