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दूसरा तर्क है कि यहाँ वर्तमान में दो अखिल भारतीय सेवाएं मौजूद हैं। यहाँ आई.सी.एस. के बचे हुए लोग भी हैं जो अभी तक भारत सरकार की सेवा कर रहे हैं। दूसरे, गत दो वर्षों में बनायी गयी ’अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा और अखिल भारतीय पुलिस सेवा’ है। क्या केंद्र सिविल अधिकारियों की भर्ती अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के आधार पर जारी रखेगा अथवा अखिल भारतीय सेवा मामला है जो आगे आने वाले अनुच्छेदों में निश्चित होना है जिससे हमारा संबंध होगा। लेकिन इसके बारे में अब तनिक भी संदेह नहीं है कि इन सेवाओं को राज्यों की सलाह/ स्वीकृति से अस्तित्व में लाया गया है। दूसरे, इनके वहाँ होते हुए उनके नियमों के लिए उपबंध करना आवश्यक है और मेरा निवेदन है कि संघ सूची ही उचित सूची है जहाँ यह उपबंध किया जा सकता है।
मेरे मित्र कामथ के इस सुझाव के बारे में कि इस प्रविष्टि में संयुक्त आयोग का जिक्र किया जाना चाहिए, मेरा निवेदन है कि अधिक गहन विचार-विमर्श जहाँ तक संयुक्त आयोग की बनावट, इसके सदस्यों की नियुक्ति तथा उनके हटाये जाने का प्रश्न है कठिनाई पैदा करेगा और केवल तीनों के बारे में एक अखिल भारतीय विषय है और इन तीनों के लिए अनुच्छेद 284 में पहले ही उपबंध किया जा चुका है। अन्य सभी के बारे में वास्तव में राज्य लोक सेवा आयोग हैं। उदाहरण के लिए कुछ सेवाएं अलग करने के लिए अथवा कुछ मामलों में उनकी सलाह लेने के लिए यह अब भी राज्य लोक सेवा आयोग होगा। और इन विषयों में राज्य के क्षेत्र को निकालना वांछनीय नहीं होगा क्योंकि इसके परिणाम वैसे ही होंगे जैसे संयुक्त आयोग को प्रविष्टि 58 में रखा गया था। इसी प्रयोग के लिए मैं श्री कामथ के प्रस्ताव का विरोध कर रहा हूँ।
श्री एच.वी. कामथ : क्या मैं जान सकता हूँ यह समवर्ती सूची में जाएगा?
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं।
श्री एच.वी. कामथ : यह कहाँ जाएगी?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कुछ संदर्भां में केवल केंद्र हो सकता हैः उदाहरण के लिए यदि राज्य संयुक्त रूप से कहते हैं कि एक संयुक्त लोक सेवा आयोग बनाया जाए, तब प्रस्ताव के परिणामस्वरूप, केंद्र को क्षेत्र प्राप्त होगा, अन्यथा नहीं।
डॉ. पी.एस. देशमुख : मैं सभा की आज्ञा से अपना संशोधन वापिस लेने के लिए निवेदन करता हूँ।
(सभा की आज्ञा से संशोधन वापिस लिया गया।)