186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय सभापति : मैं श्री कामथ से संशोधन को मत के लिए प्रस्तुत करूँगा।
(यह वापिस लिया गया, डॉ. अम्बेडकर का संशोधन रखा गया। प्रविष्टि 58 संशोधित रूप में संघ सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 58क
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं प्रस्ताव करता हूँ :
“कि सूची I की प्रविष्टि 58 के पश्चात् निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाए :
’58क. संघ पेंशन, अर्थात् भारत सरकार द्वारा भुगतान की जाने वाली अथवा भारत की संचित निधि से भुगतान की जाने वाली पेंशन।’
यह प्रविष्टि प्रारूप में नहीं है। सावधानी के तौर पर हम इसे रखना आवश्यक महसूस करते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कि मेरे मित्र डॉ. देशमुख द्वारा सुझाया गया संशोधन कोई सुधार है अथवा मेरे द्वारा पेश किए गए संशोधन से भिन्न है। जो अंतर मालुम पड़ता है वह यह है कि कुछ पेंशन होनी चाहिए जो भारत की संचित निधि से दी जानी चाहिए इसका अर्थ है कि करों की प्राप्ति से। भारत सरकार के लिए पेंशन स्थापित करना पूर्णतः संभव होगा जो सहयोगी प्रवृत्ति की है इस दशा में संचित निधि पर भार नहीं होगा अपितु व्यक्तियों पर होगा जो पहले ही संचित निधि को अपना भाग दे चुके हैं। यही अंतर है और इसी कारण मेरे द्वारा प्रविष्टि इन शब्दों में बनाई गई है।
डॉ. पी.एस. देशमुख : मैं अपना संशोधन वापिस लेना चाहूँगा।
(सभा की आज्ञा से संशोधन वापिस लिया गया।)
(डॉ. अम्बेडकर का प्रस्ताव स्वीकार किया गया और प्रविष्टि 58क संघ सूची में जोड़ी गई।)
प्रविष्टि 60
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि सूची 1 की प्रविष्टि 60 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
“60. पुराने और ऐतिहासिक स्मारक और राष्ट्रीय महत्व के संसद के कानून द्वारा घोषित लेख प्रमाण“
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 799-801
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 800