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माननीय सभापति : अब मैं नई प्रविष्टि 61क को मत के लिए रखता हूँ।
(डॉ. अम्बेडकर का प्रस्ताव मत के लिए रखा गया।)
* श्री वी. एस. सरवते : मैं डॉ. अम्बेडकर से जानना चाहूँगा कि “सीमाशुल्क की सीमा के बाहर निर्यात“ शब्दों का अर्थ क्या है?
माननीय सभापति : मुझे खेद है प्रश्न देर से आया जब मत लिया जा चुका है उसके पश्चात्।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि आदरणीय सदस्य बाद में मेरे पास आएंगे तो मैं उनको समझा दूँगा।
माननीय सभापति : प्रश्न रखा जा चुका है।
[ प्रस्ताव स्वीकार किया गया था। प्रविष्टि 61क संघ सूची में जोड़ी गई। ]
प्रविष्टि 63
** माननीय सभापति : अब हमें प्रविष्टि 63 लेनी चाहिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति जी, मूल प्रविष्टि के स्थान पर मैं संशोधन संख्या 3551 को पेश नहीं कर रहा हूँ। संशोधन संख्या 34 के बारे में जिसे मैं पेश कर रहा हूँ ऐसा करने में मैं इसमें संशोधन संख्या 212 भी मिला रहा हूँ। श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है कि -
“सूची 1 की प्रविष्टि 63 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’63. संसद के कानून द्वारा खतरनाक ज्वलनशील घोषित तेल-क्षेत्र और खनिज तेल साधन, पेट्रोल और पेट्रोल उत्पादन दूसरे तरल और द्रव्य वस्तु ठीक करना और विकास’।“
*** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता हूँ कि इन दोनों में से कोई एक संशोधन आवश्यक है। मेरे मित्र श्री शिब्बनलाल सक्सेना के विचार में जो उद्देश्य है अर्थात् प्रविष्टि 63 को भी केंद्र को तेल के लिए विस्तार ठीक करने की आज्ञा देनी चाहिए इत्यादि का उद्देश्य ठीक करना और विकास शब्दों से पूरा हो जाएगा जो हमने प्रयोग किए हैं। ’क्षण’ शब्द जोड़ने के बारे में ऐसी कोई शक्ति रखना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 804
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 8804
*** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 805