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दूसरे, संशोधन के बारे में जैसे नई प्रविष्टि 64ख को रखने......
माननीय सभापति : उसे पेश नहीं किया गया है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, पेश किए गए संशोधन को मैं स्वीकार नहीं कर सकता।
माननीय सभापति : मैं संशोधन को मत के लिए रखूँगा।
प्रश्न है :
कि ’सूची 1 की प्रविष्टि 64 के पश्चात् निम्नलिखित नई प्रविष्टि जोड़ी जाएः
’64(क) पशुपालन सहित कृषि, जंगलात और मत्स्य क्षेत्र और खाद्य सामग्री की आपूर्ति और वितरण का विकास और सहकारिता।’
(संशोधन अस्वीकार किया गया।)
* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : संशोधन के प्रथम भाग के बारे में प्रारूपण समिति का प्रस्ताव विषय को समवर्ती सूची में रखने का है और यदि मेरे मित्र श्री सक्सेना समवर्ती सूची की परीक्षा करते तो पाते कि प्रविष्टि 64ख जैसी (क) एक प्रविष्टि है समवर्ती सूची की प्रविष्टि 35क में -
(ख) के बारे में, यह वाद-विवाद का विषय है और प्रारूपण समिति इस प्रश्न पर अभी किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंची है। प्रारूपण समिति महसूस करती है कि (क) शक्तियों का, जो हमने पहले ही संसद को कुछ उद्योगों को राष्ट्रीय महत्व की घोषित करने के लिए दी है; पूर्णतः तर्कसंगत है। यदि संसद को कुछ उद्योगों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने की शक्ति प्राप्त है तो संसद को ऐसे कुछ उद्योगों के सामान और उत्पादन को ठीक/व्यवस्थित करने की शक्तियाँ प्राप्त होनी चाहिएं। लेकिन (ख) संसद द्वारा राष्ट्रीय महत्व के घोषित उद्योगों के अतिरिक्त उद्योगों के सामान के बारे में है। जैसा मैंने कहा, यह विषय कुछ वाद-विवाद का है और प्रारूपण समिति किसी निर्णय पर नहीं पहुंची है। मैं प्रो. सक्सेना को इस विषय पर उस समय तक डटे रहने का सुझाव देता हूँ जब तक प्रविष्टि 35 को हम समतर्वी सूची में नहीं पहुंचा देते।
प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना : इन्तजार करने में मुझे कोई एतराज नहीं है।
माननीय सभापति : तब इसे रोका जाता है।
* * * *
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 811