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192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रविष्टि 65

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्री कामथ का संशोधन मुझे एकदम अनावश्यक प्रतीत होता है क्योंकि ’तेलक्षेत्र’ शब्द सामान्य अर्थ में प्रयोग किया गया है। जहाँ कहीं भी यह आता है, वह केंद्र का अधिकार क्षेत्र होगा। यदि तेल क्षेत्र पानी के नीचे आता है....

माननीय सभापति : वह कहता है ’और उथले समुद्रीय क्षेत्र’

श्री एच.वी. कामथ : मैं कहता हूँ ’खानें, तेल क्षेत्र और उथले समुद्रीय क्षेत्र’

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : जो मेरे मित्र मस्तिष्क में रखते हैं वह ’समुद्र में डुबकी लगाने का कार्य’ है।

श्री एच.वी. कामथ : नहीं, मोती उद्योग।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं यही कह सकता हूँ कि मैं विषय पर विचार करूँगा।

सभापति : तब मैं पहले प्रो. सक्सेना द्वारा पेश किए गए संशोधन को रखूंगा। प्रश्न हैः

“कि सूची 1 की प्रविष्टि 65 में ’नियम’ शब्द के पश्चात् ’और कल्याण’ शब्द रखे जाएं।“

संशोधन अस्वीकार किया गया।

श्री एच.वी. कामथ : डॉ. अम्बेडकर के विश्वास के विचार से अब मैं अपने संशाध्धन का दबाव नहीं डालता। इस पर प्रारूपण समिति द्वारा विचार किया जाना चाहिए।

(प्रस्ताव स्वीकार हुआ। प्रविष्टि 65 संघ सूची में जोड़ी गई।)

प्रविष्टि 66

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है कि :

“सूची 1 की प्रविष्टि 66 के ’और तेल क्षेत्र’ शब्द हटा दिए जाएं।“

यह पहले ही प्रविष्टि 63 में अंतरित हो गए हैं। श्री जगतनारायण लाल (बिहार : सामान्य) : सभापति जी मैं साधारणतः संशोधन

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 813