195
’69क. संसद के प्रत्येक सदन तथा, सदस्य और प्रत्येक सदन की समितियों के विशेष-धिकार, उन्मुक्तियाँ और शक्तियाँ।’
माननीय सभापति : श्री कामथ के नाम पर इसके लिए संशोधन संख्या 219 है।
श्री एच.वी. कामथ : मुझे अपना संशोधन प्रस्तुत नहीं करना है, लेकिन मैं जानना चाहूँगा कि डॉ. अम्बेडकर कैसे भूल गए अथवा उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीशों का स्थान कैसे खो दिया।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उनके वेतन इत्यादि अनुसूची में उपबंधित हैं।
| vE | csM | dj |
|---|
हमने कहा है कि उनके वेतन वैसे ही होंगे जैसे अनुसूची में दिए हुए हैं।
माननीय सभापति : तब डॉ. देशमुख का संशोधन संख्या 220। क्या यह अधिक उचित ढंग से राज्य सूची में नहीं जाएगा?
डॉ. पी.एस. देशमुख : नहीं श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि सूची 1 की संशोधन संख्या 39 (छठा सप्ताह) सूची 1 की प्रस्तावित प्रविष्टि 69 के बाद निम्नलिखित नई प्रविष्टि जोड़ी जाए :
69क. विधानमंडल और उनकी समितियों के सदस्यों के विशेषाधिकार, उन्मुक्तियां तथा शक्तियां’
....मैं सोचता हूँ कि यह बहुत आवश्यक है कि विशेषाधिकार समान होने चाहिएं। एक राज्य से दूसरे में अंतर नहीं होना चाहिए। श्री बृजेश्वर प्रसाद : सुनिए, सुनिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उचित यही है कि प्रत्येक विधानमंडल अपने
| vE | csM | dj |
|---|
विशेष अधिकारों, उन्मुक्तियों तथा शक्तियों की परिभाषा करे और यही कारण है कि हमने यह व्यवस्था की है कि संसद अपने सदस्यों के विशेष अधिकारों, उन्मुक्तियों तथा शक्तियों को निश्चित करे और अपने सदस्यां के लिए राज्य के पास भी ऐसी ही शक्तियां होनी चाहिएं। मैं नहीं समझता कि संपूर्ण शक्तियां केंद्र में समेकित कर दी जाएं। मुझे सोचना चिहए था कि यदि संसद अपने सदस्यों के विशेष अधिकार, उन्मुक्ति तथा शक्तियों का एक अधिनियम पारित करती है, कदाचित राज्य भी ऐसा ही करेंगे और जैसा उचित समझेंगे थोड़े संशोधन के साथ एक-एक शब्द / अक्षर की नकल करेंगे।
(डॉ. देशमुख का संशोधन खारिज हुआ, डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकार किया गया, प्रविष्टि 69 तथा 69क संशोधित रूप में संघ सूची में जोड़ी गई।)