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लिए प्रेरित करे और बताए कि क्या मानक अच्छे हैं अथवा बुरे। इसको संघ सूची में लाना उससे भी अच्छा है। जहाँ तक शेष मामले का संबंध है प्रविष्टि 43 को सूची II में जोड़ने का सोचा गया है। जैसे यह है कि राज्य अपना नियंत्रण, सिनेमाघर, नाट्य प्रदर्शन और सिनेमा ऋण स्वीकृति का प्रश्न; जैसा है बनाए रखें। मैं नहीं समझता कि प्रस्ताव से जिसे मैंने बनाया है किसी विशेष हित को किसी प्रकार की हानि होगी। दूसरे, जैसा मैंने कहा कि केंद्र की भांति शक्तियों को एक संस्था में केंद्रित करने से लाभ होंगे।
श्री राजबहादुर : केवल स्वीकृति देना?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : एक बार केंद्र ने स्वीकार कर दिया कि चलचित्र अच्छा है और नैतिकता के मानदण्ड को मान/स्वीकार करती है, मुझे कोई कारण दिखाई नहीं देता कि प्रदर्शन के लिए यहाँ कोई दूसरा उपबंध क्यों होना चाहिए। मामला समाप्त होता है।
माननीय सभापति : मैं संशोधन संख्या 222 को मत के लिए रखता हूँ।
डॉ. पी.एस. देशमुख : मैं इसे वापिस लेना चाहूँगा।
(संशोधन सदन की मंजूरी से वापिस लिया गया।)
श्री राजबहादुर : मैं अपना संशोधन संख्या 266 वापिस लेना चाहूँगा।
(सभा की इजाजत से संशोधन वापिस किया गया। प्रविष्टि 70क संघ सूची में जोड़ी गई।)
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* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर इसके बाद प्रविष्टि 73 आती है।
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“कि सूची 1 की प्रविष्टि 73 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि रखी जाए :
’73. अंतरराज्यीय व्यापार और वाणिज्य’
प्रविष्टि 73 में इन शब्दों के बाद के शब्द अनावश्यक हैं, क्योंकि सूची II की प्रविष्टि 33 को छोड़ने का प्रस्ताव है।
माननीय सभापति : इस संशोधन संख्या 226 के लिए यहाँ अन्य संशोधन श्री
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 31 अगस्त, 1949, पृ. 825