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भावी बाजार पर करों की प्राप्ति, इसलिए प्रदेशों के मध्य वितरण के अधीन वे होंगे। मुझे भरोसा है कि इससे वे सभी शंकाएं दूर हो जाएंगी जो कुछ सदस्यों को है कि वह प्रविष्टि यदि सूची 1 में रहेगी तो केन्द्र को करों को विनियोजित करने की शक्ति होगी। यह इरादा नहीं है। प्रविष्टि विशुद्ध रूप से विधायी है। इसमें वित्तीय झंझट बिल्कुल भी नहीं होगा।
पंडित हृदयनाथ कुंजरू (संयुक्त प्रदेश : सामान्य) : क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से पूछ सकता हूँ कि इस संबंध में क्या वह अनुच्छेद 277 को उपान्तरण करने का इरादा रखते हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ठीक है, विषय को सदृश बनाने के लिए किसी भी आवश्यक परिणाम के उपबंध को लाने पर विचार करूँगा।
(प्रविष्टि 79 संघ सूची में जोड़ी गई।)
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| p | kgr |
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प्रविष्टि 81
सभापति महोदय, मैं पेश करने की आज्ञा चाहता हूँ।
श्री बृजेश्वर प्रसाद :
’संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 3572 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएः
कि सूची I प्रविष्टि 81 के स्थान पर निम्नलिखित रखी जाए :
“81. कृषि भूमि सहित संपत्ति के उत्तराधिकार के संबंध में शुल्क “
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं यह बताना चाहूँगा कि सम्मेलन में प्रांतीय प्रीमियरों से इस विषय पर विचार-विमर्श किया गया था। उनकी राय थी कि यद्यपि सिद्धांत बहुत अच्छा हो सकता है फिर भी इस पर वे आमूलचूल बदलाव के लिए तैयार नहीं थे।
(श्री बृजेश्वर प्रसाद का संशोधन वापिस किया गया और प्रविष्टि 81 संघ सूची में जोड़ी गई।)
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* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 833