प्रविष्टि 83 - Page 223

202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* माननीय सभापति : इसके दो संशोधन हैं।

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“कि सूची I की प्रविष्टि 83 में शब्द ’रेलवे के पश्चात’ एक कौमा और ’समुद्र’ शब्द जोड़ा जाए। ’समुद्र’ शब्द को जोड़कर प्रविष्टि पूरी करने का इरादा है जो प्रमाद/असावधानी से छूट गया था।

* * * *

** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं डॉ. देशमुख का संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि ’भूमि’ शब्द का जोड़ना केंद्र को सड़क से ले जाए गए माल व सवारियों पर सीमा कर लगाने की भी अनुज्ञा देगा। हमारी योजनानुसार सड़क से जाने वाले माल व सवारियों पर सीमा कर केवल विभिन्न राज्यों के अधिकार क्षेत्र में होगा। यह मुख्य उद्देश्य है जिसके कारण मैं संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। श्रीमन, आपको याद होगा कि उन्होंने ऐसा ही संशोधन दूसरे अवसर पर पेश करने की कोशिश की थी जिसे सदन ने अस्वीकार कर दिया था।

अब श्री सिधवा के बारे में, इस विषय पर पिछली बार पुनः बहस हुई थी और मैंने कहा था कि यद्यपि ये कर केंद्र द्वारा लगाए जाने योग्य थे, उससे होने वाली प्राप्ति विभिन्न राज्यों के मध्य वितरित होगी। केंद्र उसमें किसी हित का दावा नहीं करेगा। यदि राज्य प्राप्ति लेने के पश्चात् उसका कुछ भाग स्थानीय निकायों को देना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने की स्वतंत्रता होगी। कर संबंधी किसी विषय के लिए जो स्थानीय प्राधिकार के लिए प्राप्त हो, इस संविधान में उपबंध करना संभव नहीं है। यह राज्य और स्थानीय प्राधिकरण के बीच का मामला है। इसलिए अब इस प्रविष्टि को संशोधन अथवा उसे सूची II में अंतरित करके बदलना संभव नहीं है।

(श्री आर के सिधवा व डॉ पी एस. देशमुख ने अपने संशोधन वापिस लिए।)

“कि सूची 1 की प्रविष्टि 83 में ’रेल’ शब्द के पश्चात एक कौमा और ’समुद्र’ शब्द जोड़े जाएं।

(डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकार कर लिया गया। प्रविष्टि संख्या 83 संशोधित रूप में संघ सूची में जोड़ी गई।)

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 833

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 1 सितम्बर, 1949, पृ. 838